ऑस्ट्रेलिया में हिन्दी भाषी समुदाय
सन् 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय ही हिन्दी को देश की राष्ट्रभाषा का स्थान दिया गया था।
इसकी अधिकतर शब्दावली सँस्कृत से निकली हुई है, कहा जाता है कि यह भाषा, अंग्रजी व चीनी भाषा के बाद विश्व में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।
यह बहुत से देशों जैसे मॉरिशस, फिजी, ट्रिनिडाड और गुयाना आदि में बोली जाती है।
आगमन
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के इमीग्रेशन का इतिहास सन् 1800 के आस पास तक जाता है, उस समय ठेके पर काम करने के लिये हिन्दु श्रमिकों का एक छोटा सा समूह यहाँ लाया गया था।
लेकिन सन् 1900 तक इस समुदाय के बहुत से लोग छोटे व्यवसाय करने लगे और इसमें वृद्धि के साथ विविधता भी आई।
हिन्दी भाषी समुदाय के बहुत से माइग्रेंट्स पंजाब क्षेत्र से आकर उत्तरी न्यु साउथ वेल्स व ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी समुद्र तटीय हिस्से में बस गये।
अवस्थापन
60 के दशक के अंत में, जैसे जैसे श्वेत अॉस्ट्रेलिया नीति का ह्यास होने लगा, युरोप के अतिरिक्त अन्य स्थानों से आने वालों के लिये प्रतिबंधात्मक माइग्रेशन नीतियों में ढील दी गई और बहुत से हिन्दी भाषी डॉक्टर्स, अध्यापक व तकनीशियन्स ऑस्ट्रेलिया में आये।
सन् 1947 में भारत में जन्में लगभग 8,000 लोग ऑस्ट्रेलिया में रह रहे थे। सन् 1991 तक यह सँख्या बढ़ कर अनुमानित तौर पर 62,000 हो गई।