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Supreme court of India has ruled that judges can waive off 6-months 'cooling off' period if there is no possiblity of reconciliation.
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By
vivek asri

13 Sep 2017 - 11:56 AM  UPDATED 13 Sep 2017 - 12:01 PM

भारत में तलाक के लिए छह महीने का इंतजार खत्म

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए उस शर्त को खत्म कर दिया है जिसके तहत तलाक से पहले पति-पत्नी को छह महीने इंतजार करना पड़ता था.

एनडीटीवी की वेबसाइट पर प्रकाशित एक खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बेमकसद शादी को खींचने का कोई तुक नहीं. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब जज अपने हिसाब से फैसला कर सकता है कि किसी पति-पत्नी के मामले में छह महीने के इंतजार की जरूरत है या नहीं.

फिलहाल हिंदू मैरिज ऐक्ट में यह प्रावधान है कि पति-पत्नी जब सहमति से तलाक के लिए अर्जी देते हैं तो छह महीने का इंतजार करना पड़ता है. असल में यह इंतजार 18 महीने का हो जाता है क्योंकि सहमति से तलाक में 12 महीने अलग रहने का नियम भी है. इस नियम का मकसद पति-पत्नी को अपने मतभेद सुलझाने के लिए थोड़ा और समय देना होता है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "शादी को बचाने के लिए हर कोशिश करनी चाहिए लेकिन इसकी संभावना ना होने की सूरत में अदालत के पास यह ताकत होनी चाहिए कि दोनों पक्षों को बेहतर विकल्प मिल सके."

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिल्ली के एक पति-पत्नी के मामले में दिया जिन्होंने दरख्वास्त की थी कि उनका छह महीने का वक्त हटा दिया जाए क्योंकि वे लोग आठ साल से अलग रह रहे थे.

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