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जानिए क्या है बलपूर्वक नियंत्रण और यह घरेलू हिंसा से कैसे अलग है

The NSW government plans to criminalise coercive control. (representative image) Source: AAP Image/Anna Gowthorpe/PA Wire

न्यू साउथ वेल्स सरकार कोअरसिव कंट्रोल यानी बलपूर्वक नियंत्रण के विरुद्ध एक नया कानून बनाने जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए कानून का ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समाज पर भी सीधा और गहरा असर पड़ेगा।

मनोचिकित्सक और ऑस्ट्रलेशियन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स एंड हेल्थ की कार्यकारी निदेशक डॉ मंजुला ओ'कॉनर कहती हैं कि बलपूर्वक नियंत्रण का मतलब है एक व्यक्ति के अंदर उसके जीवनसाथी या पार्टनर द्वारा यह डर पैदा कर देना कि उस व्यक्ति का कभी भी अपमान हो सकता है, उसके खिलाफ कभी भी हिंसा हो सकती है, और उसे कभी भी विवाह के बंधन से मुक्त किया जा सकता है।     


मुख्य बातें:

  • डॉ मंजुला ओ'कॉनर कहती हैं कि बलपूर्वक नियंत्रण महिला और पुरुष दोनों के ही ख़िलाफ हो सकता है
  • कोअरसिव कंट्रोल में एक व्यक्ति के पिछले कुछ सालों के व्यवहार का विश्लेषण किया जाता है: डॉ ओ'कॉनर
  • यदि आप पारिवारिक हिंसा के खिलाफ मदद चाहते हैं तो आप कॉल करें 1800 रिस्पेक्ट को 1800 737 732 पर

प्रोफेसर ओ'कॉनर कहती हैं कि बलपूर्वक नियंत्रण महिला और पुरुष दोनों के ही ख़िलाफ हो सकता है, पर अधिकतर मामलों में इसका शिकार महिलाएं ही होती हैं।

वह कहती है कि घर में गाली-गलौज करना, बरतन फेंकना, ऊंची आवाज में बोलकर तर्क जितना, अपने साथी के बहार आने-जाने पर पाबंदी लगाना, यह फैसला करना कि वह किसे से बातचीत कर सकते हैं और उनकी कमाई पर नियंत्रण रखना आदि कोअरसिव कंट्रोल के कुछ लक्षण हैं।

​Dr Manjula O’Connor
​Dr Manjula O’Connor.
Supplied by Dr Manjula O'Connor

प्रोफेसर ओ'कॉनर कहती हैं कि कोअरसिव कंट्रोल में एक व्यक्ति के पिछले कुछ सालों के व्यवहार का विश्लेषण किया जाता है और यह पता लगाया जाता है कि दोनों पति-पत्नी में गलती किसी की है। जबकि घरेलू हिंसा का मामला एक घटना के आधार पर भी दर्ज किया जा सकता है।

प्रोफेसर ओ'कॉनर कहती है कि ऑस्ट्रेलिया के भारतीय समाज में घरों में कम ही लड़ाई-झगड़े होते हैं, पर यह भी सच है कि भारतीय संस्कृति में अक्सर पुरुष ही घर के सभी बड़े और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं।

वह कहती हैं कि भारतीय समाज में पुरुषों की प्रधानता की एक तरीके से स्वीकृति होती है और इसलिए कई बार यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि यह कोअरसिव कंट्रोल है या पितृसत्ता।

प्रोफेसर ओ'कॉनर कहती हैं कि यह अति आवश्यक है कि पुरुष सभी निर्णयों में अपनी पत्नी या पार्टनर को शामिल करें ताकि आने वाले नए कानून के तहत उनका गलत शोषण न हो।

वह कहती हैं कि न्यू साउथ वेल्स सरकार यह कानून सभी समुदायों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ही लागू करेगी। उनका कहना हैं कि इसके लिए न्यायपालिका, पुलिस, प्रशासन और समाजसेवी संस्थाओं को बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रोफेसर ओ'कॉनर कहती हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में तीन से चार साल तक का समय लग सकता है।

यदि आप या आप के जानने वाले पारिवारिक हिंसा के खिलाफ मदद चाहते हैं तो आप कॉल करें 1800 रिस्पेक्ट (RESPECT) को 1800 737 732 पर। आप इनकी वेबसाइट 1800respect.org.au का भी रुख कर सकते हैं। पुरुषों की रेफरल सेवा (Men’s Referral Service) के लिए काल करें 1300 766 491 पर या जाएं ntv.org.au.

ऊपर तस्वीर में दिए ऑडियो आइकन पर क्लिक कर के हिन्दी में पॉडकास्ट सुनें।

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