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ऑस्ट्रेलिया का सबसे खतरनाक फेफड़ों का कैंसर सिर्फ धूम्रपान करने वालो को नहीं होता है

Adenocarcinoma is often associated with a history of smoking, but it is also the most commonly diagnosed lung cancers for non-smokers. Source: AAP

लंग कैंसर यानि फेफड़ों का कैंसर ऑस्ट्रेलिया का सबसे खतरनाक कैंसर है, इसके कारण ब्रैस्ट और प्रोस्टेट कैंसर से ज़्यादा लोगों की मृत्यु होती है।

फेफड़ों के कैंसर के लिए ना तो कोई राष्ट्रीय तौर पर स्क्रीनिंग और ना ही पड़ताल का प्रोग्राम है जिसकी वजह से बहुत से मरीज़ो को बीमारी का पता तब चलता है जब देर हो चुकी होती है।

कैंसर की जंग जीत चुके कुछ लोग समाज को ये बताने के लिए सामने आये हैं कि ये मानना गलत है कि केवल धूम्रपान करने वालो को ही फेफड़ों का कैंसर होता है। 

करीब एक साल तक नेटली डब्स को ये समझ ही नहीं आया कि उन्हें क्या हो गया है। 

शुरुवात में तो ऐसा लगा कि सर्दी खाँसी हो गयी है लेकिन ये पूरी गर्मी ठीक नहीं हुई। 

फिर सर दर्द ने उन्ही परेशान कर दिया, नेटली ने सोचा उनके सोने के तरीके की वजह से ऐसा हो सकता है। 

सर दर्द माइग्रेन में बदल गया और गोलियों ने असर करना बंद कर दिया। 

नेटली कई डॉक्टरों के पास गई, लेकिन कोई भी उनकी परेशानी की वजह नहीं पता कर सका फिर एक ट्रेनी जीपी ने उनका पूरा चेकअप करने के बाद सीटी स्कैन की सलाह दी। 

सुश्री डब्स को तुरन्त सर के टयूमर को निकलने के लिए ऑपरेशन के लिए ले जाया गया। 

लेकिन बाद में सीटी स्कैन से पता चला कि ये कैंसर उनके फेफड़ो से फ़ैला था। 

फेफड़ों का कैंसर ऑस्ट्रेलिया में पाँचवाँ सबसे ज़्यादा पाये जाने वाला कैंसर है, लेकिन इससे मरने वालो की संख्या सबसे अधिक है, यानि ऑस्ट्रेलिया में कैंसर से मरने वाले हर पांच मरीजों में से एक फेफड़ों के कैंसर का होता है।  

नेटली के कैंसर का कारण एक जीन का मियूटेट यानि रूपांतरित होना था। 

उनको फेफड़ों के कैंसर से जुड़ी उन भ्रांतियों का भी सामना करना पड़ा कि ये धूम्रपान यानि सिगरेट, हुक्का या तम्बाकू के सेवन के कारण होता है।

पिछले महीने एस्पिरेशन नामक प्रोग्राम को फ़ेडरल सरकार ने पांच मिलियन डॉलर की फंडिंग दी, इस प्रोग्राम में मरीज़ो की जेनोमिक सिक्वेंसिंग के माध्यम से ट्रीटमेंट की पहचान की जाती है।  

लंग फाउंडेशन के सीईओ मार्क ब्रूक फ़ेडरल सरकार द्वारा दी गयी फंडिंग की घोषणा का स्वागत करते हैं, लेकिन उनका कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के सबसे घातक कैंसर से लड़ने के लिए ज़्यादा मदद की दरकार है।  

वे कहते हैं कि फेफड़ों के कैंसर के रिसर्च और ट्रीटमेंट के लिए दी जाने वाली फंडिंग बाकि साधारण कैंसर की फंडिंग से भी काम है।  

 कैंसर ऑस्ट्रेलिया की सीईओ डॉ डोरोथी कीफे हैं। 

सुश्री कीफे कहती हैं कि जल्दी बीमारी का पता चलने से फेफड़ों के कैंसर से हर साल होने वाली मौतों की संख्या में कमी लायी जा सकती है।

 

 

 

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