Coming Up Tue 5:00 PM  AEST
Coming Up Live in 
Live
Hindi radio
SBS हिन्दी

धार्मिक उपवास क्या है, यह स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?

Fasting has been used therapeutically since at least the 5th century bce, when Greek physician Hippocrates recommended abstinence from food to some patients. Source: Getty Images/mustafagull

चाहे खाने-पीने से पूरी तरह परहेज करना हो या खाने का हल्का, कम कैलोरी वाला रूप हो, उपवास ईसाई धर्म, इस्लाम, यहूदी धर्म, बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म, ताओवाद और जैन धर्म सहित दुनिया भर के विभिन्न धर्मों और दर्शनों में प्रचलित है।

ऑस्ट्रेलिया जैसे बहुसांस्कृतिक देश में रहते हुए, सबसे अधिक संभावना रहती है ऐसे लोगों से मिलना या उनसे दोस्ती करना  जो एक अलग धर्म या संस्कृति के हों।

सांस्कृतिक और भाषाई रूप से विविध (CALD) समुदायों की धार्मिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को समझने और उनकी सराहना करने में सक्षम होना महत्वपूर्ण है,  तभी एक सामंजस्यपूर्ण समाज की रचना हो पाती है। 

इन्हीं प्रथाओं में से एक है धार्मिक उपवासहै जो कई अलग-अलग धर्मों द्वारा अपनाया जाता है।


मुख्य बातें:

  • शोध से पता चला है कि उपवास सेल पुनर्जनन और दीर्घायु में सहायता कर सकता है।
  • कई धर्मों और दर्शनों में, या तो रुक-रुक कर उपवास या कैलोरी कम करने का अभ्यास सदियों से किया जाता रहा है।
  • बच्चों, बुजुर्गों और खाने के विकार वाले लोगों को उपवास नहीं करना चाहिए।

डायना अब्देल-रहमान, ओएएम, कैनबरा में ऑस्ट्रेलियन मुस्लिम वॉयस रेडियो (एएमवी रेडियो) पर अध्यक्ष हैं।

उस पर हर साल रमजान के बारे में एक रेडियो कार्यक्रम प्रस्तुत करती है,।

यह एक अंग्रेजी भाषा का रेडियो कार्यक्रम है और रमजान के दौरान 24 घंटे प्रसारित होता है।

सुश्री अब्देल-रहमान का कहना है कि रमज़ान मुसलमानों के लिए ईश्वर और अपने धर्म के साथ फिर से जुड़ने का समय है।

"उपवास वास्तव में शरीर, मन और आत्मा को लाभ पहुंचाता है। रमजान के महीने के दौरान आप अक्सर अपनी प्रार्थनाओं को बढ़ाते हैं। यह एक मौका है जहां हर कोई भगवान के साथ फिर से जुड़ता है," सुश्री अब्देल-रहमान ने कहा।

"यह एक मौका है जब हम सब कुछ छोड़ कर पूरी तरह से अपने विश्वास पर ध्यान केंद्रित करते हैं"।

रमजान इस्लामी कैलेंडर में नौवें महीने के लिए अरबी नाम है। इस महीने के दौरान, जो 29 या 30 दिनों तक चल सकता है, चंद्र कैलेंडर के आधार पर, मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक न तो खाते हैं और न ही पानी पीते हैं।

Muslim praying
Fasting is one of the Five Pillars of Islam.
Pexels/Monstera

रुक - रुक कर उपवास

रमजान आंतरायिक उपवास यानि विभिन्न प्रकार से खाने के पैटर्न का एक रूप है, जिसमें आवर्ती आधार पर 12 घंटे से लेकर कई दिनों तक की अवधि के लिए कुछ भी नहीं या कुछ कैलोरी का सेवन किया जाता है।

क्वींसलैंड विश्वविद्यालय में मान्यता प्राप्त अभ्यास आहार विशेषज्ञ, व्याख्याता और शोध अकादमिक डॉ वेरोनिक चाचेय कहती हैं, कि रमजान समय-प्रतिबंधित भोजन की श्रेणी में आता है - जो एक प्रकार का आंतरायिक उपवास है।

उन का कहना है कि सीमित समय के लिए पूरी तरह से भोजन से परहेज करने से शरीर को कुछ महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं।

"उपवास के दौरान, आप आणविक स्तर पर सेल के लचीलेपन को ट्रिगर कर रहे हैं। सेल एक प्रतिक्रिया के साथ हल्के तनाव में बदल जाता है - हल्का इसलिये क्योंकि यह बहुत लंबे समय का नहीं है - इससे कुछ ऐसे जीनस् सक्रिय होंगे जो एन्जाइमस् के साथ डीटोक्स करते हुये सेलस् की सफाई करते हैं। 

intermittent fasting
Getty Images/lacaosa

इसके सबूत नहीं मिलते कि पानी से परहेज करने से कोई फायदा हुआ है। डा चाचेय कहती हैं कि पीने का पानी वास्तव में विषाक्त पदार्थों को दूर करने के लिए फायदेमंद होगा।

जब लोग उपवास कर रहे होते हैं, तो "ऑटोफैगी" नामक एक प्रक्रिया विभिन्न प्रकार के ऊतकों और अंगों में प्रेरित होती है। और जब लोग उपवास तोड़ते हैं, तो यह फिर से कोशिकाओं के पुनर्जनन प्रक्रिया में योगदान करता है।

हालांकि, जब कोई फिर से खाना शुरू करता है, तो अच्छा खाना खाना महत्वपूर्ण है, और अधिक मीठा या वसायुक्त भोजन नहीं करना चाहिए, विशेष रूप से जब शाम को उपवास तोड़ा जाता है।  क्योंकि, "रात के समय उच्च इंसुलिन अच्छे स्वास्थ्य परिणामों से जुड़ा नहीं है।” 

यहूदी धर्म में, इस्लाम की तरह, उपवास का उद्देश्य भोजन और पीने से पूरी तरह से परहेज करना है - जिसमें पानी भी शामिल है।

उपवास का अभ्यास हिंदू धर्म का भी एक प्रमुख हिस्सा है, और यह हल्के प्रतिबंध से लेकर अत्यधिक परहेज़ तक हो सकता है। हिंदू धर्म में हालांकि, उपवास एक दायित्व नहीं है, बल्कि एक नैतिक और आध्यात्मिक कार्य है जहां उद्देश्य शुद्ध करना है

Ramadan food
Breaking fast in Ramadan.
Getty Images/Jasmin Merdan

कैलोरी प्रतिबंध

कुछ धर्मों के उपवास में निश्चित अवधि के दौरान कुछ प्रकार के भोजन से परहेज करना शामिल है।

उदाहरण के लिए, कैथोलिक लेंट के दौरान शुक्रवार को मांस नहीं खाते हैं, और ग्रीक रूढ़िवादी ईसाई ज्यादातर डेयरी उत्पादों, अंडे, और मांस, और कभी-कभी जैतून का तेल और मछली से तीन अवधियों के दौरान प्रत्येक वर्ष कुल 180-200 दिनों के लिए दूर रहते हैं।

डा चाचेय का कहना है कि इस प्रकार का उपवास कैलोरी प्रतिबंध (सीआर) की श्रेणी में फिट बैठता है।

इस सिद्धांत पर आधारित एक आधुनिक आहार है क्रोन डायट -आहार - CRON-diet (calorie restriction practice on optimal nutrition), जिसमें स्वास्थ्य और ढ़लती उम्र बढ़ने के प्रयास में कैलोरी प्रतिबंध शामिल है, लेकिन साथ ही विभिन्न पोषक तत्वों की अनुशंसित दैनिक मात्रा प्रदान करने का प्रयास किया जाता है।

family dinner
Pexels/Nicole Michalou

डा चाचेय का कहना है कि यहां विचार शरीर को हल्के तनाव में डालने का है, जिसका अर्थ है कि शरीर जो कुछ भी प्राप्त कर रहा है, उसका अधिक से अधिक उपयोग करना सीखता है। 

"जाहिर है कि सभी स्थितियां जो शरीर में अतिरिक्त वसायुक्त ऊतक से जुड़ी होती हैं - जैसे हल्की सूजन - जो सभी पुरानी बीमारी के अग्रदूत हैं, नहीं होती हैं," उसने कहा।

इसका कुल प्रभाव यह है कि यह उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर देगा।

आधुनिक आहार

आंतरायिक उपवास के लोकप्रिय संस्करणों में 5:2 आहार शामिल है, जिसमें सप्ताह में दो बार एक दिन में 500 से अधिक कैलोरी नहीं खाना शामिल है।

इसके लेखक, डॉ माइकल मोस्ले ने हाल ही में फास्ट 800 के साथ योजना को अपडेट किया है, जो दो दिनों के लिए 800 कैलोरी और शेष पांच पर कम कार्ब आहार निर्धारित करता है।

डॉ वाल्टर लोंगो द्वारा तैयार की गई एक अन्य वैज्ञानिक रूप से समर्थित योजना फास्टिंग मिमिकिंग डाइट है।

डा चाचेय का कहना है कि इस तरह का उपवास हार्मोन को रीसेट करने में मदद कर सकता है, और सेल नवीनीकरण को भी बढ़ावा दे सकता है।

child eating
Children should not fast.
Pixabay/Jill Wellington

उपवास हर किसी के लिए नहीं है

डा चाचेय का कहना है कि कम वजन वाले लोगों के लिए या पहले से कोई बीमारी है, या वह जिन्हें खाने की बीमारी है। उनके लिये उपवास की सिफारिश नहीं की जाती है,

अदामा कोंडा कैनबरा इस्लामिक सेंटर में इमाम हैं। उनका कहना है कि रमजान के दौरान बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों से रोजे रखने की उम्मीद नहीं की जाती है।और यदि आप शारीरिक रूप से ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं, तो आपको इसे करने की अनुमति नहीं है।

डा चाचेय संतुलित आहार के महत्व पर जोर देती हैं और एक नई आहार व्यवस्था शुरू करने से पहले किसी जीपी या स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से बात करने की सलाह देती हैं।


ऊपर तस्वीर में दिए ऑडियो आइकन पर क्लिक कर के हिन्दी में पॉडकास्ट सुनें।

हर दिन शाम 5 बजे एसबीएस हिंदी का कार्यक्रम सुनें और हमें  Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

 

 

 

 

 

 

Coming up next

# TITLE RELEASED TIME MORE
धार्मिक उपवास क्या है, यह स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है? 16/04/2022 10:32 ...
इस साल ऑस्ट्रेलिया में 1 जुलाई से टैक्स में क्या बदलाव होने वालें हैं? 01/07/2022 07:31 ...
तुमको न भूल पाएंगे:राजेंद्र कृष्ण 01/07/2022 07:18 ...
एसबीएस बॉलीवुड टाइम: 30 जून 2022 30/06/2022 09:16 ...
लखनऊ का चिड़ियाघर बना भारत का सबसे पहला ब्लाइंड फ्रेंडली ज़ू 29/06/2022 08:14 ...
तुमको न भूल पाएंगे: श्यामा 24/06/2022 06:52 ...
एसबीएस बॉलीवुड टाइम: 23 जून 2022 23/06/2022 08:49 ...
मिलिए रामदास से जो गुजरात में बीमार जूतों का अस्पताल चला रहें है 21/06/2022 05:24 ...
तुमको न भूल पाएंगे: नसीम बानो 20/06/2022 07:00 ...
एसबीएस बॉलीवुड टाइम: 17 जून 2022 17/06/2022 09:00 ...
View More