इन खेलों के इतिहास और पिछले 32 सालों में इस आयोजन का यात्रा के बारे में दलविंदर बताते हैं कि साल 1987 में ये दो टीमों से शुरू हुआ था. इन दोनों टीम के बीच तब एक हॉकी मैच हुआ था. और 32 साल बाद इस आयोजन के अलग-अलग खेलों में 231 टीम भाग ले रही हैं. जिनमें 3500 से ज्यादा खिलाड़ी होंगे. जहां तक इन खेलों को देखने आने वालों की संख्या की बात है उससे भी इन खेलों की लोकप्रियता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. दलविंदर गारचा दावा करते हैं कि साल 1987 में महज़ 50 दर्शकों के साथ शुरु हुआ सिख खेलों का ये आय़ोजन अब तीन दिनों में 100 हज़ार दर्शकों के पार पहुंच गया है.

अब हमने जानना चाहा कि इस आयोजन में कौन कौन से खेलों की प्रतियोगिता होगी. दलविंदर बताते हैं कि इसमें कबड्डी के अलावा 16 खेल होंगे. जिनमें तैराकी को पहली बार शामिल किया गया है. इनके अलावा नेट बॉल, वॉली बॉल, टेनिस, सॉकर, क्रिकेट और फूटी जैसे गेम होंगे.
फूटी के बारे में बताते हुए दलविंदर कहते हैं कि इस बार फूटी के प्रसिद्ध 6 ऑस्ट्रेलियाई क्लब भी सिख खेलों में भाग ले रहे हैं. जिनमें मैलबर्न, एडिलेड और सेंट किल्डा जैसे क्लब शामिल हैं. फूटी में भारतीय खिलाड़ियों की भागीदारी के बारे में दलविंदर कहते हैं कि भारतीय मूल के फूटी खिलाड़ियों की टीम बनने लगी हैं और उन्हें उम्मीद हैं कि अगले 5 से 10 सालों में लोग भारतीय मूल के खिलाड़ियों को भी टीवी पर फूटी खेलते हुए देखेंगे.

सिख खेलों के आयोजन के बारे में बात करते हुए दलविंदर कहते हैं कि सिख संस्कृति को देखते हुए यहां पर लंगर का आयोजन भी किया जा रहा है. जिसमें कि कराब 120 हज़ार लोगों के खाने का इंतज़ाम होगा. चाहे वो खिलाड़ी हों, आयोजक हों या फिर दर्शक. उन्होंने कहा कि इस लंगर के लिए शेपर्टन और केर्न्स जैसे दूर दराज के इलाकों से भी लोग केले और ताज़े फलों का सहयोग कर रहे हैं.
दलविंदर कहते हैं कि खेलों के आलावा भी तीन दिनों के इस आयोजन में बच्चों के लिए भी काफी कुछ है साथ ही तीन दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी धूम रहेगी जिनमें 1960-70 के दशक के पंजाब के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल होंगे.
दलविंदर ने बताया कि इसके अलावा दो होटल और बसों का भी इंतज़ाम किया गया है. बुज़ुर्गों और बच्चों को एक आयोजन स्थल से दूसरी जगह ले जाने के लिए भी बसों का इंतज़ाम है.

अब हमने सवाल किया कि क्या दलविंदर इन खेलों से ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को निकलते देख रहे हैं. इस पर दलविंदर कहते हैं कि अभी भी कई ऐसे खिलाड़ी सिख गेम्स में भाग ले रहे हैं जो अपने अपने खेलों में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करते हैं.
दलविंदर ने बताया कि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक स्कॉलरशिप योजना भी है.
