इसी साल जुलाई महीने में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापारिक रिश्तों को और मज़बूत बनाने का रोड मैप दर्शाती एक रिपोर्ट रिलीज़ हुई जिसका शीर्षक था “An India Economic Strategy to 2035: Navigation from Potential to Delivery”.

क्या कहती है पीटर वर्गीज़ की रिपोर्ट ?
ये रिपोर्ट भारत में हाईकमिश्नर रह चुके और मौजूदा वक्त में यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के चांसलर पीटर वर्गीज़ ने तैयार की है. वर्गीज़ की इस रिपोर्ट में भारत के साथ 10 क्षेत्रों में आर्थिक और व्यावसायिक अवसरों का अधिक से अधिक लाभ लेने की रणनीति तैयार की गई है.
इस रिपोर्ट को साल 2035 तक की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. रिपोर्ट में खास तौर पर कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली लगभग 7 लाख लोगों की आबादी इस रणनीति को कारगर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है.
वर्गीज़ रिपोर्ट पर लेबर पार्टी ने दिखाया उत्साह
इस रिपोर्ट पर फेडरल सरकार के साथ साथ विपक्ष भी उत्साहित दिखाई दे रहा है. लेबर पार्टी में शेडो मिनिस्टर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट जेसन क्लेयर कहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया और भारत के रिश्ते बहुत अच्छे हैं लेकिन बावजूद इसके भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापार उतना अच्छा नहीं जितना होना चाहिए. जेसन कहते हैं
“भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया का व्यापार उतना है जितना कि न्यूज़ीलैंड के साथ है जबकि न्यूज़ीलैंड की जनसंख्या, दिल्ली की जनसंख्या के चौथाई है. मैं सोचता हूं कि हम एक दूसरे को कहीं ज्यादा सामान बेच सकते हैं और एक दूसरे की अर्थव्यवस्था में कहीं ज़्यादा निवेश कर सकते हैं.”
जेसन कहते हैं कि पिछली कुछ सरकारों ने भारत के साथ व्यापार को बढ़ाने की कोशिश की लेकिन ये कुछ 20-20 क्रिकेट फॉर्मेट जैसा था. लेकिन हमको किसी लंबी योजना पर काम करने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि अगर लेबर पार्टी सत्ता में आती है वो वर्गीज़ रिपोर्ट के महत्वपूर्ण 10 सुझावों को लागू करेंगे.
एसबीएस हिंदी के ये पूछे जाने पर कि क्या वो बात है जिसे लेकर ऑस्ट्रेलिया भारत के साथ मज़बूत व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाने की पहल कर सकता है ? जेसन ने भी वर्गीज़ रिपोर्ट की बात को दोहराते हुए कहा कि
"करीब 7 सौ हज़ार ऑस्ट्रेलियाई नागरिक भारतीय मूल के हैं जो कि ऑस्ट्रेलिया के लिए एक बहुमूल्य संपत्ति है. जो कि भारत के साथ एक मज़बूत व्यापारिक संबंध स्थापित करने में सहायक हो सकते हैं."
अब सवाल ये था कि व्यापार के क्षेत्र में चीन, ऑस्ट्रेलिया का एक बड़ा सहयोगी है तो ऐसे में क्या ऑस्ट्रेलिया अपने पुराने सहयोगी को नाराज़ किए बिना भारत के साथ अपने व्यापार को उस ऊंचाई तक ले जा पाएगा जिस ओर वर्गीज़ रिपोर्ट इशारा करती है.

जेसन कहते हैं कि चीन एक बड़ा देश है. लेकिन भारत को किसी भी लिहाज़ से कमतर नहीं आंका जा सकता वो कहते हैं कि दरअस्ल इंडो पैसेफिक रीज़न के सभी देशों में अच्छी आर्थिक वृद्धि हो रही है.. और दुनिया की आर्थिकी हमारे इलाके ओर मुड़ रही है. अगले एक दशक में दुनिया के दो तिहाई मध्यम वर्गीय उपभोक्ता हमारे रीज़न में होंगे. साफ है कि ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को लिए भी ये मौका होगा जब वो तय कर सकती है कि वो इन उपभोक्ताओं के लिए किस तरह से उत्पाद या सेवाएं मुहैया करा सकती हैं.
