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और उन्होंने करियर की जगह बच्चों को चुना

आपने दुनिया में बहुत सी ऐसी महिलाओं की कहानियां सुनी होंगी जिन्होंने अपने करियर में सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं. ज़ाहिर है करियर में, समाज में, एक मुकाम तक पहुंचने में बहुत मेहनत लगती है समय लगता है, और जब हम एक मुकाम पा लेते हैं तो उससे ऊंचे मुकाम पर पहुंचने का सपना बुन लेते हैं. फिर बस उसको पाने की कोशिशों में लग जाते हैं. लेकिन कहते हैं ना इस दुनिया में सबसे ऊंचा मुकाम अगर है तो वो है मां का.

Women who left their jobs for childrens
Source: Supplied

4 min read

Published

By Gaurav Vaishnava


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आज हम आपको ऐसी ही कुछ महिलाओं से मिलवा रहे हैं जो अपने करियर में एक मुकाम पा चुकीं थी या फिर और भी अच्छे मुकाम के रास्ते पर आगे बढ़ चुकीं थीं लेकिन फिर उन्होंने लिया एक बढ़ा फैसला. उन्होंने अपनी जॉब छोड़ने का या फिर अपने करियर को बदलने का फैसला लिया. पता हैं क्यों? क्योंकि उनको अहसास हुआ मुकाम का जहां उनको किसी ओहदे की जगह मां के नाम से पुकारा जाता है.

सिडनी में रहने वाली वर्षा ठाकुर सांकला एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और भारत, अमेरिका के बाद ऑस्ट्रेलिया में भी सर्विस नाव जैसी कुछ बेहतरीन आईटी कंपनियों में काम कर चुकी हैं. उनका अनुभव उनका काम उन्हें और ऊंचे मुकाम पर ले जा सकता था लेकिन करीब एक साल पहले उन्होंने एक फैसला लिया कि वो नौकरी छोड़ देंगी और ज्यादा से ज्यादा समय बच्चों को देंगी.

Charan Ahuja with family
Charan Ahuja with her family Source: Supplied

ऐसा ही सोचने वाली एक और महिला चरन आहूजा कैनन ऑस्ट्रेलिया में अकाउंट एडमिनिस्ट्रेटर थीं.. कंपनी काम सबकुछ अच्छा चल रहा था.. करीब 9 साल पहले जब वो मैटरनिटी लीव पर गईं तो फिर उन्होंने दोबारा काम पर नहीं लौटने की ठानी. उनका कहना है कि.

"घर पर तब केवल मैं और मेरे पति थे. हमने तब फैसला किया कि मैं बच्चों को समय दूंगी साढ़े तीन साल बाद दूसरा बच्चा भी दुनिया में आया तो सोचा कि इसके साथ कैसे भेदभाव किया जा सकता है इसलिए उसे समय देने के लिए भी घर पर ही रही"

अब मिलिए अनीता से वो जब भारत से यहां आई थीं तो हर किसी प्रवासी की तरह उनके सामने परिवार को आर्थिक तौर पर मदद करने की चुनौती थी. और इसके लिए उन्होंने चाइल्ड केयर का कोर्स किया. अच्छी बात ये थी कि उन्हें नौकरी भी मिल गई और इस काम में वो अपने बच्चे की देखभाल भी कर पा रही थीं. लेकिन इस बार उनका बच्चा स्कूल जाने लगा है. बस मां का दिल नहीं माना और उन्होंने नौकरी छोड़ दी.

Varsha Thakur Sankla with family
Source: Supplied

अब हमने जानना चाहा कि क्या नौकरी छोड़ने पर इन माओं को इस बात का ख्याल नहीं आया कि करियर छोड़ना या बदलना इनके लिए अच्छा नहीं भी हो सकता है या फिर अगर वो अभी बच्चों के साथ कुछ समझौता करती हैं तो करियर में वो काफी आगे जा सकती हैं. इस बारे में वर्षा कहती हैं.

"सच कहूं तो बिल्कुल भी ऐसा खयाल नहीं आया, क्योंकि उस वक्त हमारी प्राथमिकता हमारे बच्चे थे. मैने सोचा कि नौकरी तो फिर कभी भी की जा सकती है लेकिन बच्चों का ये मासूम बचपन वापस नहीं आएगा."

चरन भी कहती हैं उन्हें इस बात का पछतावा तो नहीं है कि उन्होंने बच्चों के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी लेकिन वो मानती हैं कि अब दोबारा शुरूआत के लिए उन्हें एक नई ऊर्जा चाहिए होगी क्योंकि उन्हें नौकरी छोड़े काफी वक्त हो गया है.

Aneeta with her family
Source: Supplied

अनिता कहती हैं कि उनकी नौकरी जाने पर उन्हें आर्थिक तौर पर थोड़ा फर्क तो पड़ा लेकिन ये परेशानियां बच्चों की खुशी से बड़ी नहीं हैं. वो कहती हैं.

"थोड़ा बहुत फर्क पड़ा लेकिन मैनेज हो जाता है, अब बच्चे की चाइल्ड केयर की फीस भी तो नहीं जाती. लेकिन जब बच्चे को मेरी सबसे ज्यादा ज़रूरत है उस वक्त मैं उसके पास रहना चाहती हूं."

अब हमने जानना चाहा कि इन माओं को अपने बच्चों को समय देते हुए किस तरह की संतुष्टि होती है चरन कहती हैं कि वो बच्चों को समय देती थी और उन्हें इस बीच दूसरी माओं को समझने का भी मौका मिला. वर्षा कहती हैं कि वो अब अपने बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिता पा रही हैं.

अनीता को इंतज़ार है कि उनके बच्चे का मन स्कूल में ठीक तरह से लग जाए. तो फिर वो कोशिश कर सकती हैं कि उन्हें सुबह की शिफ्ट मिल जाए. और वो फिर से अपने परिवार को आर्थिक तौर पर मदद कर पाएं.

वर्षा भी एक गणित का एक एजुकेशनल सेंटर चलाती हैं और वो मानती हैं कि इस तरह से वो कुछ काम भी कर पा रही हैं और बच्चों को उनका कीमती वक्त भी दे पा रही हैं. वहीं चरन भी अब अपने पति के व्यवसाय में हाथ बंटा देती हैं.


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