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भारत में तीन तलाक बिल संसद में पास

भारत में अब तीन बार तलाक कहकर पत्नी को छोड़ना अपराध होगा. लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी यह बिल पास हो गया है और राष्ट्रपति की मंजूरी की औपचारिकता पूरी होने के बाद जल्द ही कानून अमल में आ जाएगा. इस कानून के तहत तीन बार तलाक कहने वाले को तीन साल तक की कैद हो सकती है.

Activists of various social organisations hold placards during a protest against "Triple Talaq", a divorce practice prevalent among Muslims in New Delhi, India, Wednesday, May 10, 2017
Activists during a protest against "Triple Talaq", a divorce practice prevalent among Muslims in New Delhi, India. Source: AAP

भारत की हिंदू-राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी की सरकार इस कानून को लेकर लंबे समय से प्रयासरत थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान भी इस बिल को पास करवाने की कोशिश की गई थी लेकिन भारी विवाद और विरोध के कारण ऐसा नहीं हो पाया था. और फिर सरकार के पास संसद में जरूरी बहुमत भी नहीं था. उसकी अपनी सहयोगी पार्टियां जैसे जनता दल युनाइटेड इस बिल का विरोध करती रही हैं. मंगलवार को भी राज्य सभा में जनत दल युनाइटेड ने विरोध किया लेकिन वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया जिसका फायदा सरकार को मिला.

इस बिल के पास होने को प्रधानमंत्री मोदी ने गौरव का पल बताया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, "तीन तलाक बिल का पास होना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। तुष्टिकरण के नाम पर देश की करोड़ों माताओं-बहनों को उनके अधिकार से वंचित रखने का पाप किया गया। मुझे इस बात का गर्व है कि मुस्लिम महिलाओं को उनका हक देने का गौरव हमारी सरकार को प्राप्त हुआ है।"

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में एक फैसले में तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था और सरकार को इस संबंध में कानून बनाने का निर्देश दिया था.

Indian Muslim people hold placards and shouts anti-government slogans during a protest against approving an ordinance to ban triple talaq in Mumbai,
Indian Muslim people hold placards and shouts anti-government slogans during a protest against approving an ordinance to ban triple talaq in Mumbai, Source: AAP

नए कानून में न सिर्फ मुस्लिम पुरुषों को तीन तलाक कहने पर जेल होगी बल्कि उन्हें अपनी पत्नी को आर्थिक मदद भी देनी होगी. ऐसी स्थित में बच्चे भी मां के पास रहेंगे.

हालांकि यह कानून बनने जा रहे इस बिल को लेकर भारत में और बाहर मुसलमानों के बीच भी काफी मतभेद हैं. बहुत से मुसलमान इस कानून से सहमत नहीं हैं और इसे हिंदू राष्ट्रवादी सरकार द्वारा अल्पसंख्यक मुसलमानों को प्रताड़ित करने के तरीके के तौर पर देखते हैं. किशनगंज से कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने बिल पर बहस के दौरान संसद में कहा, "यह बिल मुसलामान औरतों की बदहाली और मुसलमानों की बर्बादी की नियत से लाया जा रहा है. यह मुसलामानों को जेल करने का नया तरीका है."

लेकिन भारत के कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार ने मुस्लिम महिलाओं से किया वादा निभाया है.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक दिन जब लोक सभा के बाद आज राज्य सभा में भी तीन तलाक़ क़ानून को मंज़ूरी मिल गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम महिलाओं को किया वादा निभाया और उनको तलाक़-तलाक़-तलाक़ से मुक्ति दिलाई."

भारत के राष्ट्रपति ने भी इसे गैरबराबरी के लिए जिम्मेदार प्रथा का खात्मा बताया है. उन्होंने लिखा, "राज्यसभा में मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक के पास होने के साथ ही संसद में एक ऐसी प्रथा के खात्मे को मंजूरी मिल गई है जो गैरबराबरी के लिए जिम्मेदार थी. यह लैंगिक न्याय की दिशा में एक मील का पत्थर है और पूरे देश के लिए संतुष्टि का पल."

उधर एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी इस बिल के पास होने को मुस्लिम पहचान पर हमले के रूप में देखते हैं. उन्होंने लिखा, "ट्रिपल तलाक़ बिल को मुस्लिमों की पहचान और नागरिकता पर 2014 से किए जा रहे हमले के एक हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए. भीड़ की हिंसा, पुलिस अत्याचार और बड़े पैमाने पर जेल में बंद करना झुका नहीं पाएगा."

ओवैसी ने उम्मीद जताई है कि इस कानून को अदालत में चुनौती दी जाएगी. एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है, "मुझे उम्मीद है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इसकी वैधानिकता को चुनौती देगा. क़ानून समाज में सुधार नहीं लाता. अगर ऐसा होता तो कन्या भ्रूण हत्या, बाल अत्याचार, पत्नियों को छोड़ देना और दहेज प्रथा इतिहास हो जाते."

प्रतिष्ठित पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने तीन तलाक बिल को मोदी सरकार की मुस्लिम विरोधी राजनीति की ही एक कड़ी बताया है. उन्होंने लिखा, "इस बात में किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि यह बिल मोदी सरकार की मुस्लिम-विरोधी राजनीति की ही एक कड़ी है. यह सिर्फ मुसलमान पुरुषों के ही नहीं बल्कि महिलाओं के भी खिलाफ है. यह सिर्फ एक ही एजेंडे को पूरा करता है - मुस्लिम मर्दों को शैतान बताओ, मुस्लिम औरतों को आश्रित करो और हिंदू वोट बैंक को खुश करो."

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