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भारत से आए पत्रकारों से बेबाक बातचीत

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापारिक संबंधों को एक नए आयाम तक पहुंचाने के उद्देश्य से कुछ समय पहले पीटर वर्गीज़ रिपोर्ट सामने आई थी. जिसमें इस संबंध में कुछ सुझाव दिए गए थे. हालांकि ये सुझाव धरातल पर कब और किस स्तर तक उतरेंगे इस बारे में कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी लेकिन इतना ज़रूर है कि दोनों ओर इस बारे में हलचल ज़रूर दिखाई दे रही है. इसी हलचल को मापने भारत से कुछ पत्रकारों का एक दल ऑस्ट्रेलिया आया था. जिनसे हमने न केवल व्यापारिक मुद्दों पर बात की बल्कि कई दूसरों मामलों पर भी उन्होंने रखी अपनी बेबाक राय.

Interview with Indian Journalists
Source: Gaurav Vaishnava

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By Gaurav Vaishnava


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भारत से आए पत्रकारों के दल में शामिल ऋतु शर्मा और मिताली मुखर्जी से हमने उनके ऑस्ट्रेलिया दौरे और भारत में चल रही गतिविधियों के बारे में बात की. सबसे पहले हम इन दोनों पत्रकारों का पूरा परिचय आपसे करा दें. ऋतु इंडियन एक्सप्रेस में स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट हैं और मिताली एडिटर जी में बिज़नेस एडिटर हैं. 

हमने जब वर्गीज़ रिपोर्ट पर उनके आंकलन के बारे में जानना चाहा तो ऋतु ने बताया कि इस पर हालांकि काम बहुत सुस्त गति से चल रहा है लेकिन देर से ही सही अब दोनों देशों की ओर से हलचल देखी जा रही है. उधर मिताली ने भी वर्गीज़ रिपोर्ट की तारीफ करते हुए कहा कि रिपोर्ट के सुझाव किस हद तक ज़मीन पर उतरकर आते हैं इस पर उनकी नज़र रहेगी.

Indian Journalists
Source: Gaurav Vaishnava

आम चुनावों के बाद भारत के राजनीतिक परिदृश्य पर बात करते हुए मिताली मुखर्जी कहती हैं.

"लंबी चुनावी प्रक्रिया के बाद भारत में राजनीतिक स्थिरता का माहौल है लेकिन मोदी सरकार को अब काम करके दिखाना होगा. भारत में पिछले दो सालों से अर्थव्यवस्था पिछड़ती हुई नज़र आ रही है. पिछले कई दशकों की तुलना में बेरोज़गारी दर भी चरम पर है."

लेकिन मिताली मानती हैं कि कई ऐसे काम हुए हैं जिन पर एनडीए को वोट पड़ा है जिनमें ग्रामीण अंचलों के लिए कुछ योजनाएं और शौचालय जैसी योजनाएं अहम हैं. 

ऋतु बताती हैं छात्रों के लिए यहां दी जाने वाली सुविधा की वजह से छात्रों को यहां आना ज्यादा अच्छा और आसान हो गया है. 

वहीं सोशल मीडिया में आने वाली फेक न्यूज़ और भारतीय मीडिया पर सत्ता के नज़दीक होने के आरोपो पर पूछे सवालों का बेबाक जवाब देेते हुए मिताली ने माना कि ऐसा हो रहा है  वो कहती हैं

"मैं ये मानती हूं कि पिछले कुछ सालों में मीडिया में मूल्य़ों का ह्रास हुआ है, मैं सोचती हूं कि इसके लिए टीवी न्यूज़ को ज्यादातर जिम्मेदार माना जाना चाहिए. सत्ता के लिए विपक्ष की भूमिका निभाने की बात अगर छोड़ भी दें तो जो विकास के मुद्दे हैं हम उसे भी पीछे छोड़ते जा रहे हैं."

उधर फेक न्यूज़ के मामले में ऋतु कहती हैं.

"जो मीडिया है, वो वो ही दे रही है जो लोग देखना चाहते हैं. मुझे लगता है कि समाज को ये तय़ करना है कि उन्हें क्या देखना है, इससे बचने के लिए उन्हें ही आगे आना होगा."

 


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