वैसे तो हम सभी अनगिनत सपने संजोए अपने देश से बाहर आते हैं, लेकिन यहां बात उन छात्रों की है जिनके सामने अच्छी पढ़ाई, अच्छे मौके, और साथ ही अच्छी ज़िंदगी के सपने एक साथ जुड़े होते हैं. ज़ाहिर है कुछ लोग सब कुछ पा लेते हैं. और कुछ थोड़ा बहुत ही सही. लेकिन बड़ी बात होती है मौके को तलाशने और उस मौके पर सवार होकर दुनिया को दिखाने की. कि चुनौती कोई बी हो हम तैयार है.
तो चलिए इसी जज़्बे से सराबोर एक छात्रा से मिलाते हैं जिन्हें न्यू साउथ वेल्स का इंटरनेशनल स्टूडेंट एंबेसडर चुना गया है. इनका नाम है. पूजा बिरादर. चलिए पहले तो पूजा के बारे में जानते हैं पूजा भारत में गुजरात के सूरत शहर की रहने वाली हैं. वो करीब एक साल पहले ही ऑस्ट्रेलिया में न्यू साउथवेल्स की ऑस्ट्रेलियन कैथलिक यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ प्रोफेशनल एकाउंटिंग कर रही हैं.
लेकिन उन्होंने स्टूडेंट एंबेसडर क्यों बनना चाहा. ये पूछने पर पूजा ने बताया कि वो मानती है कि पढ़ाई के अलावा भी कई चीज़ें हैं जो आपके व्यक्तित्व को निखारने में सहायक होती हैं. और फिर उन्हें लगता है कि इससे उनके करियर में भी कई फायदे होंगे.

हालांकि वो बताती हैं कि एंबेसडर बनना कोई आसान काम नहीं था इसके लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी. पूजा बताती हैं कि एंबेसडर बनने का मौका उन्हें विश्वविद्यावय की ओर से ही मिला जहां उन्हें करीब साढ़े तीन सौ छात्र-छात्राओं के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी कई चरणों की चयन प्रक्रिया के बाद करीब 30 छात्र-छात्राओं को इंटरनेशनल स्टूडेंट एंबेसडर बनाया गया.
अब हमने जानना चाहा कि एक इंटरनेशनल स्टूडेंट एंबेसडर के तौर पर उनकी क्या क्या ज़िम्मेदारियां होंगी. तो पूजा ने बताया कि उन्हें ज़िम्मेदारी दी गई है कि वो विदेशी छात्र-छात्राओं को ये बताएं कि न्यू साउथ वेल्स और ख़ासकर सिडनी में उनके लिए अध्ययन के क्या क्या मौके हैं.
पूजा मानती हैं कि पढ़ाई की बड़ी ज़िम्मेदारी तो उन पर है ही और साथ में उन्हें अब एक और अहम ज़िम्मेदारी उन्हें मिल गई है.. लेकिन वो इन ज़िम्मेदारियों को भी एक लर्निंग प्रोसेस के तौर पर देख रही हैं.. वो मानती हैं कि एक एंबेसडर के तौर पर उनके व्यक्तित्व में भी निखार आएगा और कुछ दूसरे फायदे भी उनके करियर में इससे हो सकते हैं.
