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भारतीय माइग्रेशन एजेंट अविनेश भारद्वाज की कंपनी के खिलाफ जांच शुरू

ऑस्ट्रेलिया के कई जाने माने नेताओं के साथ तस्वीरों में नजर आने वाले भारतीय मूल के एक व्यापारी अविनेश भारद्वाज के खिलाफ जांच शुरू की गई है. भारद्वाज पर आरोप हैं कि उन्होंने कई लोगों से दसियों हजार डॉलर लिए लेकिन उन्हें स्किल्ड वर्किंग वीसा नहीं दिलावाया, जैसा कि उन्होंने कथित तौर पर वादा किया था.

Avinesh Bhardwaj
अविनेश भारद्वाज Source: ABC Australia

4 min read

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By विवेक आसरी


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एबीसी ने खबर छापी है कि बॉर्डर फोर्स के अधिकारियों ने हाल ही में मेलबर्न में भारद्वाज के कई ठिकानों पर छापे मारे. भारद्वाज की माइग्रेशन सर्विस उपलब्ध कराने वाली कंपनी वाईएबीएस सर्विसेज के दफ्तरों की तलाशी ली गई. एबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक अविनेश भारद्वाज इस वक्त ऑस्ट्रेलिया में नहीं हैं.

एबीसी ने भारत और पाकिस्तान के कई ऐसे लोगों से बात की जो दावा करते हैं कि बीएबीएस ने ऑस्ट्रेलिया में स्किल्ड वीसा दिलाने का वादा किया था.

हाल ही में एक ऐप्लिकेंट की अर्जी दाखिल भी की गई और उससे 30 हजार डॉलर्स लिए गए. लेकिन उसे कहा गया कि अर्जी को अप्रूव होने में तीन-चार महीने का वक्त लगेगा.

कंपनी के ग्राहंकों का दावा है कि उन्हें अर्जी नामंजूर होने की सूरत में कुछ पैसा वापस देने का वादा भी किया गया था. लेकिन कुछ लोग चार साल से भी वीसा या पैसे का इंतजार कर रहे हैं. एक ग्राहक ने तो 50 हजार डॉलर देने का दावा किया है.

विपन शर्मा अविनेश भारद्वाज के रिश्तेदार हैं और दिल्ली में काम करते हैं. जनवरी 2016 में शर्मा ने भारद्वाज से ऑस्ट्रेलिया आने की इच्छा जताई और आग्रह किया की वाईएबीएस उन्हें वीसा दिलाए.

विपिन शर्मा
विपिन शर्मा Source: ABC Australia

शर्मा कहते हैं कि उन्होंने उधार लेकर भारद्वाज को पैसा दिया लेकिन महीनों तक कुछ नहीं हुआ. शर्मा का दावा है कि जब कुछ महीनों बाद भारद्वाज दिल्ली आए तो उन्होंने विपिन शर्मा से मिलने तक से इनकार कर दिया.

शर्मा ने एबीसी को बताया, "मैंने कहा कि 457 वीसा नहीं दिला सकते तो मेरा पैसा लौटा दो. उन्होंने कहा कि पैसा दो इमिग्रेशन डिपार्टमेंट और इंपलॉयर को दिया जा चुका है, अब वापस नहीं मिल सकता."

"फिर एक दिन मैंने अविनेश को कॉल किया और अपना पैसा वापस मांगा तो वो मुझे गालियां देने लगे. और बोले, जो करना है कर लो एक पैसा वापस नहीं मिलेगा."

अविनेश की तरफ से वीसा ऐप्लिकेशन तो दाखिल की गई थी लेकिन जिस कंपनी की ओर से स्पॉन्सरशिप वीसा की बात थी, उसके मालिक ने एबीसी को बताया कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है.

पाकिस्तान में भी वाईएबीएस के कई ग्राहक हैं. सोहेल खान उनमें से एक हैं जिन्होंने 35 हजार डॉलर खर्चे हैं. खान 2015 में टेंपररी ग्रैजुएट वीसा पर ऑस्ट्रेलिया में थे. उनका वीसा खत्म हो रहा था और वह नौकरी खोज रहे थे. उन्होंने गमट्री पर एक आईटी जॉब देखी. उन्होंने अप्लाई किया तो उन्हें कुछ ही देर में वाईएबीएस की तरफ से कॉल आया और बताया गया कि उन्हें स्पॉन्सर वीसा मिल सकता है.

अगले कुछ महीनों में खान को वीएबीएस की ओर से कई दस्तावेज मिले और ऐसा लगा कि उनकी ऐप्लिकेशन पर काम हो रहा है. लेकिन इस बीच उनका वीसा खत्म हो गया और उन्हें पाकिस्तान लौटना पड़ा.

सोहेल खान
सोहेल खान Source: ABC Australia

दो साल और 35 हजार डॉलर खर्च करने के बाद भी सोहेल खान अपने वीसा का इंतजार कर रहे हैं. जब उनका धैर्य चुक गया तो उन्होंने पैसे वापस मांगे.

खान बताते हैं, "उन लोगों ने कोई बात नहीं की. मैंने जब उनसे संपर्क किया और कहा कि दो साल से कुछ नहीं हुआ तो मेरे पैसे वापस कर दो. मैंने बहुत से लोगों से उधार लिया था और वे लोग अपना पैसा वापस चहते थे. उन्होंने मेरा कॉल काट दिया और मेरा नंबर ब्लॉक कर दिया."

बॉर्डर फोर्स के एक प्रवक्ता ने एबीसी को बताया कि वाईएबीएस के खिलाफ आरोपों के बारे में एजेंसी को पता है और कंपनी के वेबसाइट पर धोखाधड़ी वाली जानकारी देने के मामले में जांच की जा रही है.

वाईएबीएस की फेसबुक ऐड
वाईएबीएस की फेसबुक ऐड Source: Facebook

प्रवक्ता ने कहा, "जिस किसी ने भी इस कंपनी की सेवाएं ली हों या इस कंपनी के साथ काम किया हो, हमसे संपर्क करे."

हमने इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए अविनेश भारद्वाज से बात करने की कोशिश की लेकिन उनका नंबर बंद बताया जा रहा है और उनसे संपर्क नहीं हो पाया.

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