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हाईवे पर शराबबंदी के लपेटे में आ गए चंडीगढ़ वाले

देश के हाईवेज के किनारे शराब बेचने पर प्रतिबंध के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर उस व्यक्ति पर भी हो रहा है, जिसने इस बैन के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी.

High Angle View Of Light Trails Seen Through Chainlink Fence At Night
High Angle View Of Light Trails Seen Through Chainlink Fence At Night. Source: GettyImages/Pulkit Chitkara / EyeEm

3 min read

Published

By Vivek Asri



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पिछले हफ्ते भारत के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि हाईवेज पर स्थित शराब की दुकानों को बंद किया जाए. यह फैसला हरमन सिद्धू की याचिका पर सुनाया गया है. लेकिन सिद्धू खुद शराब के शौकीन हैं और इस फैसले का असर उन पर भी हो रहा है. सिद्धू चंडीगढ़ में रहते हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चलते शहर के बीच स्थित कई शराब की दुकानें, पब्स और बार बंद हो रहे हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि चंडीगढ़ की कई सड़कें हाई वे हैं, जैसे मध्य मार्ग, दक्षिण मार्ग और हिमालय मार्ग आदि.

सड़क सुरक्षा के लिए जागरूकता फैलाने को अपना मकसद बना चुके सिद्धू ने हिंदुस्तान टाइम्स अखबार से कहा, "बेशक, मैं शराब पीता हूं. घर और रेस्तरां या पब्स दोनों ही जगह शराब पीना मुझे पसंद है." लेकिन वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर दुविधा में हैं. एक तरफ वह इस बात से खुश हैं कि अब शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामलों में कमी आ सकेगी और ऐसी हजारों जानें बच सकेंगी जो ड्रंकन ड्राइविंग के कारण होने वाले हादसों में जाती हैं.

दूसरी तरफ, सिद्धू इस बात को लेकर थोड़े दुखी हैं कि उनके अपने शहर चंडीगढ़ में शहर के बीच में स्थित शराब की दुकान और बार आदि भी बंद हो गए हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया को सिंधू ने बताया, "हां, थोड़ी सी चुभन तो महसूस हो रही है मुझे भी. मुझे पीना पसंद है और अब मुझे अपना स्टॉक लेने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी. मुझे यह मंजूर नहीं कि चंडीगढ़ का बड़ा हिस्सा शराबबंदी का शिकार हो जाए."

इस बात के लिए सिद्धू चंडीगढ़ प्रशासन को जिम्मेदार मानते हैं. वह कहते हैं कि प्रशासन की गलती से ही ऐसा हुआ है. टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "हाईवे तो शहर के बाहर होने चाहिए और लंबी यात्राओं के लिए इस्तेमाल होने चाहिए. लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन की बेवकूफी के कारण शहर के अंदर ही बहुत सारे हाईवे हैं. इस कारण अब सबको परेशान होना पड़ेगा, मुझे भी."

भारत में सड़क हादसों में हर साल लाखों लोग मारे जाते हैं. इनमें से बहुत से हादसे शराब पीकर गाड़ी चलाने के कारण होते हैं. जीन्यूज की रिपोर्ट है कि सिद्धू ने अपनी समाजसेवी संस्था अराइवसेफ के जरिए पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी कि हाईवेज के किनारे शराब की दुकानों पर प्रतिबंध होना चाहिए. हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया. पंजाब और हरियाणा की सरकारों ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया.

अब बहुत से राज्यों की सरकारें इस फैसले पर अमल के तरीके निकाल रही हैं.

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