ट्राइब्यूनल ने कहा है कि शर्मा को निर्वासित नहीं किया जाना चाहिेए और उनकी वीसा अर्जी को खारिज करना सही नहीं है.
अजय शर्मा की पार्टनर वीसा की अर्जी को मिनिस्टर फॉर इमिग्रेशन ऐंड बॉर्डर प्रोटेक्शन ने मार्च में खारिज कर दिया था. इसका कारण उनके कैरक्टर टेस्ट में फेल हो जाने को बताया गया था.
शर्मा ने इस फैसले के विरोध में ट्राइब्यूनल में अर्जी दायर की थी जिस पर पिछले महीने के आखिरी हफ्ते में सुनवाई हुई.
सुनवाई के दौरान अजय शर्मा ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर अपने बच्चे के साथ हिंसा करने के आरोप स्वीकार कर लिए थे.
30 साल के अजय शर्मा अक्टूबर 2009 में ऑस्ट्रेलिया आए थे. अप्रैल 2014 में उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई नागरिक सेरा स्पिटेरी से शादी की और उसी साल नवंबर में पार्टनर वीसा के लिए अर्जी दाखिली की. अगले साल मार्च में वह एक बच्चे के पिता बने. लेकिन जुलाई 2015 में स्वास्थ्य विभाग ने उनके बच्चे के शरीर पर चोटों के निशान देखे तो अजय शर्मा को अपने परिवार से अलग रहने को कहा गया.
23 जुलाई 2015 को विक्टोरिया के रॉयल चिल्ड्रन अस्पताल में बच्चे का शारीरिक परीक्षण हुआ जिसमें ऐसे संकेत मिले कि बच्चे के टखने की हड्डी टूटी हुई थी. जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि बच्चे की हड्डी ठीक हो रही थई.
शर्मा ने ट्राइब्यूनल को बताया कि उनकी पत्नी ने उनसे बच्चे को मारने का इल्जाम अपने सिर लेने को कहा था. उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी ने कहा था कि अगर हममें से किसी एक ने इल्जाम अपने सिर नहीं लिया तो बच्चे को हमसें छीन लिया जाएगा.
बच्चे के शरीर पर निशानों की सफाई में उन्होंने कहा कि उन्होंने लाड़ करते हुए बच्चे का गाल जोर से खींच दिया जिससे निशान पड़ गया. और पीठ पर चोट के बारे में उन्होंने कहा कि एक बार बच्चे के गले में कुछ फंस गया था जिसके बाद उन्होंने बच्चे की पीठ पर जोर से थपकाया था.
ट्राइब्यूनल के वरिष्ठ सदस्य डॉ. डेमियन क्रीमीन ने अजय शर्मा की बात को सच मानते हुए कहा कि यह मामला बाल शोषण की गलत पहचान का है. उन्होंने कहा, "मैं मानता हूं कि अजय शर्मा ने अपनी पत्नी के कहने पर पुलिस के सामने झूठ बोला था."
सरकारी वकील डेविड ब्राउन ने वीसा खारिज करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि शर्मा का इतिहास अपराध भरा है और उनका ऑस्ट्रेलिया में रहना खतरनाक हो सकता है.
डॉ. डेमियन क्रीमीन ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा, "मेरा विश्लेषण इस नतीजे पर पहुंचता है कि शुरुआती जांच में श्री शर्मा के निर्वासन की जरूरत नहीं है. ऐसा कोई सबूत या आधार नहीं है जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि श्री शर्मा को अगर ऑस्ट्रेलिया में रहने दिया गया तो वह आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं."


