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'दास्तान' की भी अपनी कहानी है

क्या आप जानते हैं कहानी और दास्तान में क्या फर्क़ है? क्या आप ये जानते हैं कि गुज़रे वक्त में कई-कई दिनों तक एक ही लंबी कहानी को सुनाया जाता था. जैसे आज हम सीरियल्स यानी धारावाहिक देखते हैं. जी हां कुछ ऐसे ही होती थी 'दास्तान' और 'दास्तानगोई'. यक़ीन मानिए दास्तानगोई की भी अपनी एक कहानी है जिसे समझा रहे हैं हिमांशु वाजपेयी.

Himanshu at Dastaangoi
Source: Supplied

3 min read

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Updated

By Faisal Fareed


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दादी नानी की कहानी किसको पसंद नहीं थी. अब ये सिलसिला कुछ थम सा गया हैं. हिंदुस्तान में हमेशा से कहानी सुनने और कहानी सुनाने का प्रचलन रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सैकड़ो साल पहले ये हुनर इतना ज्यादा फैला हुआ था कि एक एक कहानी सालो तक चलती थी. अब उदाहरण के तौर पर हम बता सकते हैं कि 'तिलस्म-ए-होशरुबा' 46 एडिशन में हैं और हर एडिशन में 1000 पेज यानी 46 हज़ार पेज. अब सोचिये कि ये कहानी कितनी बड़ी रही होगी.

कहानी सुनाने वाले भी पहले एक्सपर्ट होते थे और इस हुनर को दास्तानगोई कहते थे. लगातार कहानियां चलती थी. मुग़ल बादशाह अकबर के दरबार में एक से एक दास्तानगो हुए और वो सालो चलने वाली कहानी सुनाते थे. 

ये हुनर, ईरान से होते हुए दिल्ली और फिर लखनऊ में नवाबो के दौर में पहुंचा. साल 1883 में नवल किशोर प्रेस ने 46 हज़ार पन्ने की पूरी दास्तान छापी. उसके बाद ये हुनर लगभग ख़त्म सा हो गया. हालांकि 2005 में इसको फिर से जिंदा किया गया और अब ये धीरे धीरे फिर से लोगो को पसंद आने लगा है. 

हिमांशु बाजपेयी पुराने लखनऊ के रहने वाले हैं और नयी पीढ़ी के दास्तानगो हैं. वो इसके इतिहास, इसके ख़त्म होने और फिर जिंदा होने के बारे में बताते हैं कि मुग़ल बादशाह से ये दास्तानगोई लखनऊ के नवाबो तक पहुंची फिर ख़त्म हो गयी. 

काफी रोचक इतिहास है और उससे भी रोचक हैं इसका फिर से जिंदा होना. कैसे इससे नयी पीढ़ी जुडी और कौन कौन लोग इसमें शामिल रहे ये हिमांशु बताते हैं  कि दोबारा हिंदुस्तान में दास्तानगोई 2005 में जिंदा की गयी है और लोग इसे पसंद कर रहे हैं. 

अब दास्तान का तरीका बदल रहा है, अब तिलिस्म, परियों की कहानी ही इसमें नहीं हैं, अब आधुनिक युग की भी कहानी इसमें शामिल हो रही हैं. जैसे क्रांतिकारियों का मशहूर काकोरी ट्रेन डकैती काण्ड जो आज़ादी कि लड़ाई में मील का पत्थर साबित हुआ, उस पर भी दास्तान बनी हैं और सुनाई जा रही हैं.

तो फिर देर किस बात की, फिर एक बार खो जाइये पुरानी कहानियों में, क्योंकि इस पुराने खजाने में आपको बहुत सी नयी चीज़ें पता चलेंगी. यकीन मानिये, हांलांकि आजकल के युग में मनोरंजन के बहुत से साधन हैं लेकिन दास्तान आपको इन सबसे अलग सुकून का अहसास कराएगी. 


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