रिंकू राज़दान, भारत के कश्मीर से ताल्लुक रखने वाली एक महिला, पिता के काम की वजह से उनका बचपन भारत के कई राज्यों में बीता. जल्द शादी भी हो गई. लेकिन राज़दान के लिए वो शादी शादी नहीं थी. उनके लिए उस रिश्ते में घुटन थी तनाव था. वो कहती हैं 7 साल पहले एक रोज़ वो कुछ डॉलर हाथ में एक सूटकेस और गोद में 3 साल का एक बच्चा लिए ऑस्ट्रेलिया की सड़क पर थी.
उस वक्त में जब उनका दिल तनाव और अवसादों में घिरा हुआ था. तब ऑस्ट्रेलिया के कुछ ऐसे ज़िंदादिल लोग उनके सामने आए जिन्होंने उन्हें अपना समझ के मदद की. वो कहती हैं कि उन्हें न केवल भारतीय मूल के लोगों ने बल्कि चीन, फिलीपीन्स और ऑस्ट्रलिया के लोगों ने काफी मदद की. लोगों से भरपूर मदद मिलने के बाद भी राज़दान एक दिशा की तलाश में थीं. और उन्हें लग रहा था कि देश में नए लोगों के लिए प्रोफेशनल गाइडेंस का अभाव है. खास तौर पर ऐसे लोगों के लिए जो बहुत ज्यादा पैसे खर्च नहीं कर सकते.

राजदान कहती हैं कि वो जानती थीं कि वो अपने बच्चे को एक परिवार तो नहीं दे सकती लेकिन आर्थिक सुरक्षा देने की कोशिश तो कर सकती हैं. वो कहती हैं पिछले कई सालों से वो लगातार काम कर रही हैं. लेकिन जिंदगी की जद्दोजहद और रोज़मर्रा की व्यस्तता के बीच भी उनके दिलो-दिमाग पर वो बात ज़रूर छायी थी. कि देश में नए आने वाले लोगों की मदद के लिए उन्हें सही दिशा पाने में सहायता करने के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है. और इसके लिए उन्होंने अपने तक़नीकी पृष्ठभूमि पर भरोसा किया और कनैक्शन्स नाम से एक मोबाइल एक बनाया.
कनेक्शन्स एप बिल्कुल मुफ्त है. राज़दान बताती हैं कि ये एप कटिंग एज टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके आपकी दी हुई जानकारी के मुताबिक आपके उपलब्ध सेवाओं से मैच कराता है.
