एक और वीसा फ्रॉड, एक और एजेंट पर ठगी का आरोप

कई अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स ने शिकायत की है कि वीसा स्पॉन्सरशिप के नाम पर एक महिला ने उनसे हजारों डॉलर ठग लिए. स्टूडेंट्स का आरोप है कि इस महिला ने खुद को एक वकील और रजिस्टर्ड माइग्रेशन एजेंट बताया और स्पॉन्सरशिप दिलाने का वादा किया था.

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Source: Supplied

चतुरिका दिशानायका क्रैनबोर्न से हफ्ते में कई बार मेलबर्न सिटी जाती हैं. क्रैनबोर्न में वह अपने पति और 4 साल के बेटे के साथ किराये के एक घर में रहती हैं. वहां से अक्सर वह सिटी आती हैं ताकि उस महिला को खोज सकें जिसने उनसे बिजनस पार्टनरशिप देने के बदले 20 हजार डॉलर लिए थे.

38 साल की दिशानायका श्रीलंका की रहने वाली हैं. वह इंटरनेशनल स्टूडेंट के तौर पर ऑस्ट्रेलिया आई थीं. वह बताती हैं कि एक महिला ने खुद को शामना सिंह बताते हुए उनसे बिजनस पार्टनरशिप देने का वादा किया था, 50 हजार डॉलर के बदले. दिशानायका के मुताबिक शामना ने खुद को रजिस्टर्ड माइग्रेशन एजेंट और वकील बताया था. दिशानायका बताती हैं, "उसने कहा था कि उसकी एक जॉब एजेंसी है. मैं खुद आईटी से हूं. उसने कहा कि नौकरी मिलना तो मुश्किल है, मुझे एक बिजनस पार्टनरशिप खरीद लेनी चाहिए. कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से एक पेमेंट प्लान के तहत मैंने 20 हजार डॉलर दे दिए थे. उसे मेरी पार्टनरशिप के लिए इमिग्रेशन अप्रूवल के लिए अप्लाई करना था. लेकिन उनसे ऐसा नहीं किया और 15 हजार डॉलर की मांग की."

दिशानायका शामना सिंह से मार्च में आखिरी बार मिली थीं. उसके बाद से ना तो फोन पर बात हुई और ना मुलाकात हुई. शामना सिंह का ऑस्ट्रेलियन इमिग्रेशन लीगल सपॉर्ट सेंटर नाम का बिजनस भी इस साल अप्रैल में डीरजिस्टर हो गया. दिशानायका ने विक्टोरिया पुलिस से संपर्क किया. वीसैट और इमिग्रेशन डिपार्टमेंट से भी बात की. लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली. वह बताती हैं, "वीसैट कहता है कि वे कुछ नहीं कर सकते क्योंकि बिजनस डीरजिस्टर हो गया है. पुलिस कहती है कि सिविल मैटर है, हम कुछ नहीं कर सकते. पता नहीं और कितने लोग उसके शिकार बनेंगे."

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कुछ और लोग भी हैं जो शामना सिंह पर ऐसे ही आरोप लगाए हैं. वियतनाम की स्टूडेंट जो अपनी पहचान मिस नगुयेन के तौर पर उजागर करना चाहती हैं, कहती हैं कि उन्होंने रीजनल स्पॉन्सर्ड माइग्रेशन स्कीम के तहत वीसा पाने के लिए 35 हजार डॉलर दिए थे. वह बताती हैं, "वह (शामना सिंह) मेरे लिए पिछले साल एक स्पॉन्सर खोजने वाली थीं. लेकिन वह इधर उधर की बातें करती रहीं. मार्च में मेरा स्टूडेंट वीसा खत्म हो गया. फिर उसने कहा कि स्टूडेंट वीसा बढ़ाने के लिए अप्लाई करेगी. लेकिन सही वक्त पर उसने कुछ भी नहीं किया और मेरा वीसा खारिज हो गया."

नगुयेन कहती हैं कि वियतनाम में उनके परिवार ने ब्याज पर पैसे लेकर शामना सिंह को भुगतान किया था.

एक कोरियाई स्टूडेंट का दावा है कि उसने शामना सिंह को 21 हजार डॉलर दिए थे. यह स्टूडेंट अपनी पहचान जाहिर नहीं करना चाहता. वह कहता है कि वह तो फुटस्क्रे स्थित शामना सिंह के घर भी गया था जहां उसकी मुलाकात शामना के पति से हुई थी. स्टूडेंट के मुताबिक शामना सिंह के पति ने भरोसा दिलाया था कि शामना सिंह फोन करेंगी. अगले दिन फोन आया और स्टूडेंट का दावा है कि शामना सिंह ने धमकी दी कि दोबारा उसके घर आया तो पुलिस में शिकायत कर देंगी. वह कहता है, "मुझे डर है कि वह अभी भी लोगों को धोखा दे रही है."

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हमने उन प्रियंका महाजान से बात की जो शामना सिंह के बोर्क स्थित दफ्तर में काम करती थीं. यह दफ्तर अब बंद हो चुका है. महाजन कहती हैं कि उन्होंने भी शामना को वीसा स्पॉन्सरशिप खोजने के लिए 35 हजार डॉलर दिए थे. वह बताती हैं, "मैं तो खुद एक पीड़ित हूं. मैंने अपना पैसा तो खोया ही, मेरा वीजा स्टेटस भी खतरे में है."

हमने शामना सिंह से संपर्क करने की कोशिश की, उनके फोन और सोशल मीडिया पर भी संदेश छोड़े लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

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