ऑस्ट्रेलिया के भारतीय समुदाय में, प्रोफ. नलिन शारदाजी और उनकी पत्नी हेमा शारदाजी जाने माने लोग हैं.
प्रोफ. शारदाजी १९८४ में, भारत की सर्वोत्कृष्ट भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से डॉक्टरेट की उपाधि लेकर ऑस्ट्रेलिया अपने परिवार के साथ आएं. वे उनकी पत्नी - हेमा और उनके ६ माह के बेटे अंकुर के साथ पर्थ शहर आएं. उनको आज भी, ऑस्ट्रेलिया में अपना पहला दिन, अच्छी तरह से याद हैं. वो इसलिए क्यूंकि वो दिन उनका जन्मदिन था.
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प्रोफ. नलिन शारदाजी परमानेंट रेसीडेंसी लेकर ऑस्ट्रेलिया आएं थे. वो नया देश देखने के लिए बड़े उत्सुक थे और उन्होंने पहले कुछ घंटो में जो भी देखा, उससे बहुत प्रभावित हुए.

उन्हें आज भी याद हैं की ऑस्ट्रेलिया में पहले दिन ही, उनका स्वागत कितना गर्मजोशी से हुआ था. मदद के लिए लोग तत्पर थे. "मुझे याद हैं की एयरपोर्ट पर उतरने के तुरंत बाद, एक शक्श सामने आया और उसने कहाँ, 'वेलकम. आप के लिए हॉस्टल बुक की गई हैं. आप वहां फ़ोन कर सके, इसके लिए, ये लीजिये कुछ पैसे.' मैंने कहाँ, 'ये तो बढ़िया हैं' और फिर उन्होंने मुझे २० सेंट्स दिए."

"मुझे याद हैं.. पर्थ में, हम टैक्सी में हॉस्टल की और चल दिए. में खिड़की से बहार खूबसूरत पर्थ शहर को देख रहा था. सुबह के लगभग ४ बजे थे. रस्ते पर कोई नहीं था, सिर्फ हम थे. बायीं और स्वान नदी थी और उसमें घरों का प्रतिबिंब झलक आ रहा था... सब जगमगा रहा था. बहुत ही खूबसूरत दृश्य था."

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