सरकार तो बहुत नाराज है. उसकी नाराजगी का ठीकरा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल डॉ. राजीव मिश्रा पर फूटा है जिन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया है.
पर एक सवाल बाकी है कि सप्लायर को इतने लंबे समय से पेमेंट क्यों नहीं हुई थी.
बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसीपल डॉ. मिश्रा ने वेबसाइट स्क्रॉल को इस सवाल का जवाब दिया है. डॉ. मिश्रा ने इस त्रासदी की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 12 अगस्त को इस्तीफा दे दिया था. लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि उन्हें निलंबित किया गया है. स्क्रॉल की खबर के मुताबिक राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा है कि सरकार ने समय पर अस्पताल को धन दे दिया था लेकिन अस्पताल ने सप्लाई कंपनी की पेमेंट रोके रखी. मिश्रा इसे गलत बताते हैं. स्क्रॉल से बातचीत में मिश्रा ने कहा कि उन्होंने जुलाई में मंत्रालय को तीन-चार पत्र लिखकर दो करोड़ रुपये का फंड जारी करने को कहा था.
मिश्रा ने कहा, "मंत्रालय ने 5 अगस्त को फंड जारी किया. लेकिन उस दिन शनिवार था. सरकार की तरफ से जानकारी हमें 7 अगस्त को मिली. बिल ट्रेजरी डिपार्टमेंट से पास कराना होता है. कॉलेज सारे बिलों को ट्रेजरी को भेजता है. वहां के अफसर उन्हें वैरिफाई करते हैं. फिर टोकन वापस भेजते हैं. हमने 7 अगस्त को बिल वाभचर भेज दिए थे. हमें 8 अगस्त को टोकन मिला."
लेकिन 9 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरखपुर संसदीय सीट के प्रतिनिधि रहे आदित्यनाथ अस्पताल के दौरे पर आ गए और मिश्रा दावा करते हैं कि कारण पूरा प्रशासन उसी काम में लगा रहा. इस कारण 10 अगस्त को ही टोकन बैंक भेजा जा सका जिससे सप्लायर पुष्पा सेल्स को 52 लाख रुपये की पेमेंट होनी थी. दोनों के खाते अलग-अलग बैंकों में हैं तो पैसा ट्रांसफर होने में एक दिन और लग गया.
और यही दिन मौत का दिन साबित हुआ. 10 अगस्त की शाम को ऑक्सिजन खत्म हो गई थी. कंपनी ने पैसे मिलने तक और ऑक्सिजन भेजने से मना कर दिया. बच्चे मर गए.
