'हमें घरेलू हिंसा से इनकार नहीं, उपचार करना होगा'

घरेलू हिंसा हमारे समुदाय में एक गंभीर समस्या है और इससे तुरंत और पुख्ता तरीके से निपटने की ज़रूरत है. ये कहना है हरिंदर कौर का जिन्हें रिवर स्टोन से एमपी केविन कोनोली ने समाज में उनके योगदान के लिए ‘लोकल वुमन ऑफ द ईयर’ सम्मान से नवाज़ा है.

Harinder Kaur_Local woman of the year

Source: Supplied

हरिंदर कौर और उनका परिवार भी अच्छी ज़िंदगी का सपना लिए भारत से यहां आए थे. उनके सामने भी वो सभी परेशानियां थीं जो कि हर किसी प्रवासी के सामने होती हैं. उन दिनों को याद करते हुए हरिंदर बताती हैं कि वो साल 1991 में अपने पति और 2 बच्चों के साथ आई थीं. हरिंदर कहती हैं कि उन्हें सांस्कृतिक कार्यक्रमों में काफी रुचि थी. और उनके सामाजिक जीवन की शुरूआत भी ऐसे ही हुई. कई सालों तक वो सांस्कृति कार्यक्रमों में शिरकत करती रहीं जिससे उनकी सामाजिक पहचान और सराहना भी मिलने लगी थी.

Harinder Kaur_Local woman of the year
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हरिंदर बताती हैं कि हालांकि वो 2010 से ही कुछ ऐसा करना चाहती थीं जो समाज के काम आए लेकिन साल 2012 हरिंदर की ज़िंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उन्हें और उनके परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया था. एक दुर्घटना में उन्हें अपने बेटे हरमन प्रीत को खोना पड़ा. लेकिन दुख की इस घड़ी में जब उन्हें और उनके परिवार को खुद किसी सहारे की ज़रूरत थी उन्होंने खुद को दूसरे का सहारा बनाने की ठानी. हरिंदर ने परिवार के साथ मिलकर साल 2013 में हरमन फाउंडेशन की नींव डाली.

हरमन फाउंडेशन ने पहले उन लोगों की सहायता के काम करना शुरू किया जिनके परिवार में किसी की मृत्यु हो जाती थी. लेकिन हरिंदर बताती हैं कि उनके पास पहुंच रही शिकायतों के बाद समुदाय में उनके शोध ने उनका ध्यान घरेलू हिंसा की ओर खींचा. उन्होंने कहा कि लोगों ने उनकी हेल्पलाइन पर कॉल करने शुरू की. वो मानती हैं कि समुदाय में ये परेशानी काफ़ी अंदर तक है और इस बीमारी का तुरंत और पुरज़ोर तरीके से इलाज़ करने की ज़रूरत है.

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Source: EyeEm

हरिंदर मानती है कि कानून सबकी मदद के लिए हैं लेकिन हमें देखना चाहिए कि कैसे हम आपसी सामुदायिक सहयोग से आपसी संबंध सुधार सकते हैं.  हरिंदर सुझाव देती हैं कि आपसी संबंध अगर नहीं संभल रहे या परेशानी का सबब बन रहे हैं तो बजाए उन्हें किसी बड़ी घटना की जड़ बनाने के अपनी अलग राह पकड़ लेना ही बेहतर है.

हमने हरिंदर से पूछा कि अवॉर्ड मिलने के बाद वो अपनी ज़िम्मेदारियों के बारे में क्या सोचती हैं तो उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वो इतना काम कर पाएंगी. लेकिन वो मानती हैं कि ऐसे काम पहले भी होते रहे हैं. और कुछ लोग उनके बाद भी आएंगे जो समाज में एक दूसरे का सहारा बनेंगे.


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By Gaurav Vaishnava



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