ट्रूथ, पावर ऐंड फ्री प्रेस नाम से आयोजित इस प्रदर्शनी को एसबीएस की डिजिटल क्रिएटिव लैब ने म्यूजियम ऑफ ऑस्ट्रेलियन डेमॉक्रैसी के साथ मिलकर तैयार किया है. यहां विभिन्न पत्रकारों के साथ इंटरव्यू के जरिए यह बताया गया है कि लोकतंत्र पर मीडिया क्या प्रभाव डाल सकता है.
15 नवंबर से शुरु हुई इस प्रदर्शनी में लोग संसद भवन के गलियारे में चलते हुए ऑस्ट्रेलिया के पत्रकारों से विचार सुन सकते हैं, जहां पत्रकारों ने बताया है कि वे रिपोर्टिंग क्यों करते हैं और अपने काम के दौरान वे क्या जिम्मेदारी महसूस करते हैं.
एसबीएस के अरबी रेडियो 24 पर ऑस्ट्रेलिया अलोम नाम का शो पेश करने वाले पुरस्कृत पत्रकार गसान नखूल और इनसाइट कार्यक्रम की प्रस्तुतकर्ता जेनी ब्रोकी उन पत्रकारों में शामिल हैं जिनका इंटरव्यू प्रदर्शनी में दिखाया, सुनाया जा रहा है.

1989 में ऑस्ट्रेलिया आए नखूल ने लेबनान में पत्रकारिता की पढ़ाई की. उस दौरान उन्होंने देखा कि कई पत्रकारों को उनकी खबरों के कारण कत्ल कर दिया गया.
नखूल बताते हैं, "उन लोगों को इसलिए मारा गया क्योंकि उन्होंने तब की सत्ता के बारे में खबरें लिखी थीं. मुझे लगा कि लोगों को सच बताने की खातिर अपनी जान दांव पर लगाना बहुत हिम्मत की बात है."
ऑस्ट्रेलिया में काम शुरू करने के साथ ही नखूल को खोजी पत्रकारिता के खतरों से सामना हो गया.
2001 में उन्होंने लोगों की तस्करी करने वाले एक व्यक्ति का इंटरव्यू किया था. जब वह व्यक्ति पकड़ा गया और उस पर केस चला तो सरकारी वकीलों ने नखूल से उस व्यक्ति के बारे में बताने को कहा, जिसके जरिए वह तस्कर से मिले थे.
नखूल ने अपने सूत्र की पहचान गोपनीय रखने के वादा किया था लिहाजा उन्होंने उसका नाम बताने से इनकार कर दिया. उन्हें पांच साल तक जेल की धमकी भी दी गई.
वह कहते हैं, "अपने सूत्र की पहचान मेरे साथ मेरी कब्र में दफन होगी. यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पत्रकारों के सूत्र सुरक्षित रहें. यह कानूनन अधिकार होना चाहिए."

प्रदर्शनी में ऑस्ट्रेलिया के मीडिया के इतिहास की भी जानकारी दी गई है. सर हेनरी पार्केस की प्रिंटिंग प्रेस, दिवंगत कैमरामैन नील डेविस की बुलेटप्रूफ जैकेट पहने तस्वीर या फिर मिस्र की जेल से चोरी छिपे लिखे और भेजे गए पीटर ग्रेस्टे के पत्र इस प्रदर्शनी का हिस्सा हैं.
म्यूजियम ऑफ ऑस्ट्रेलियन डेमॉक्रैसी की वरिष्ठ क्यूरेटर होली विलियम्स कहती हैं कि हम लोगों को फिलवक्त मीडिया के सामने मौजूद चुनौतियों की जानकारी देना चाहते हैं और बेशक, यह भी बताना चाहते हैं कि लोकतंत्र को मजबूत और स्वस्थ रखने में आजाद प्रेस की कितनी बड़ी भूमिका है.
ग्लोबल ट्रस्ट इंडेक्स के मुताबिक दुनियाभर में पत्रकारिता पर लोगों को भरोसा 50 प्रतिशत तक घट गया है.
प्रेस की आजादी की सुरक्षा के लिए मुहीम के तहत पिछले महीने ऑस्ट्रेलिया के कई बड़े मीडिया संस्थानों ने अपनी वेबसाइट और अखबारों के पन्ने काले कर दिए थे ताकि सरकार पर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए दबाव बनाया जा सके.
यह मुहीम तब चल रही है जबकि पत्रकारों ने चिंता जताई कि देश के कानून उनके काम में बाधा बन रहे हैं क्योंकि विसलब्लोअर्स सामने आने से घबरा रहे हैं. इसके बाद सरकार ने प्रेस की आजादी के बारे में एक जांच शुरू की.
'ट्रूथ, पावर ऐंड फ्री प्रेस' कैनबरा के ओल्ड पार्ल्यामेंट हाउस में जारी है.
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