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जिन्ना हाउस को लेकर भारत और पाकिस्तान में फिर विवाद

भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से चला आ रहा एक विवाद फिर से ताजा हो गया है. मुंबई में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के बंगले को अब एक भारतीय सांसद ने दुश्मन की संपत्ति बता दिया है.

Quaid-e-Azam Md. Ali Jinnah portrait
Founding father of Pakistan Md. Ali Jinnah Source: Wikimedia Public Domain

अपने इटैलियन मार्बल और वुड पैनलिंग के लिए मशहूर इस बंगले को जिन्ना हाउस कहा जाता है. आजादी के बाद मोहम्मद अली जिन्ना के पाकिस्तान चले जाने के बाद इस बंगले पर भारत सरकार का कब्जा हो गया था. लेकिन पाकिस्तान हमेशा से इस जगह पर अपना हक जताता रहा है. और हमेशा यह यह जगह दोनों देशों के बीच विवाद की वजह रही है.

पिछले हफ्ते मंगल बीजेपी सांसद मंगल प्रभात लोधा ने कहा कि जिन्ना हाउस को दुश्मन देश की संपत्ति घोषित कर दिया जाना चाहिए और इसे महाराष्ट्र सरकार को सौंप देना चाहिए.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक लोधा ने कहा कि देश इस बंगले की देखरेख पर करोड़ों रुपये खर्च रहा है जबकि इसी जगह बंटवारे की साजिश रची गई और अब समय आ गया है कि इस जगह का उचित इस्तेमाल हो.

लोधा के बयान के जवाब में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने कहा कि यह संपत्ति पाकिस्तान के संस्थापक की है और इसके मालिकाना हक का सम्मान होना चाहिए.

जिन्ना की बेटी दीना वाडिया जो बंटवारे के वक्त भारत में ही रुक गई थीं, इस बंगले पर अपना हक जताती हैं. वह इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं.

Jinnah House
Jinnah House Source: Shivnath Jha

बंटवारे के बाद 1949 में सरकार ने एक कानून बनाया था जिसके तहत उन सभी संपत्तियों को अपने अधिकार में लिया गया जिन्हें भारत छोड़कर पाकिस्तान जाने वाले लोग खाली कर गए थे. हालांकि यह कानून अब खत्म किया जा चुका है.

भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 की जंग के बाद एनिमी प्रॉपर्टी एक्ट 1968 बनाया गया. इस कानून के तहत भारत सरकार को उन भारतीय नागरिकों की संपत्तियों पर अधिकार मिला जो पाकिस्तान या चीन चले गए. जवाब में पाकिस्तान ने भी ऐसा ही कानून बना दिया.

लेकिन पिछले महीने भारत ने अपने कानून में एक संशोधन किया जिसमें यह प्रावधान किया गया कि अब भारत में रहने वाले लोग भी उन संपत्तियों पर अपना हक नहीं जता सकते, जिनका मालिकाना हक कभी पाकिस्तान या चीन चले गए लोगों के पास था. हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि यह संशोधन देश के मुसलमानों के साथ न्याय नहीं करता. देश में ऐसी संपत्तियों की कुल कीमत 15 अरब डॉलर के लगभग आंकी गई है.

सुप्रीम कोर्ट में एनिमी प्रॉपर्टी एक्ट के खिलाफ दलीलें दे चुके वकील आनंद ग्रोवर ने रॉयटर्स एजेंसी से कहा, "सरकार जिन्ना हाउस पर भी यह कानून लागू कर सकती है क्योंकि यह कानून बीते समय से भी लागू किया जा सकता है. यह एक तरीका हो सकता है जिसके तहत असंख्य संपत्ति विवादों को सरकार खत्म कर सकती है."

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Published

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By Vivek Asri



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