पाकिस्तान की एक अदालत ने कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाई है. उन पर भारत के लिए पाकिस्तान में जासूसी करने के आरोप थे. भारतीय मीडिया के मुताबिक इस घटना पर भारत ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया जाहिर की है. समाचार एजेंसी पीटीआई ने लिखा है कि भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर ने भारत में पाकिस्तान उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया और घटनाक्रम पर भारत की नाराजगी जाहिर की. पीटीआई के मुताबिक बासित को भारत की ओर से आपत्ति पत्र भी सौंपा गया जिसमें कहा गया कि जाधव को सजा सुनाए जाने के लिए जिस प्रक्रिया का पालन किया गया वह हास्यास्पद थी क्योंकि उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं थे.
पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने एक बयान जारी किया था. इस बयान पर प्रतिक्रिया में भारत ने कहा कि जाधव को पिछले साल ईरान से अगवा किया गया था और पाकिस्तान में उनकी मौजूदगी का कोई पुख्ता ब्यौरा नहीं दिया गया.
पीटीआई ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के आधार पर इस्लामाबाद स्थित अपने उच्चायोग के जरिए जाधव से मिलने की कई बार कोशिश की. भारत की ओर पाकिस्तान को दिेये गये पत्र में कहा गया है कि 25 मार्च 2016 से 31 मार्च 2017 के बीच इस्लामाबाद उच्चायोग ने 13 बार जाधव से मुलाकात की औपचारिक अर्जियां भेजीं जिन्हें खारिज कर दिया गया.
पीटीआई के मुताबिक विदेश सचिव ने अपने बयान में कहा, "कानून और न्याय के आधारभूत नियमों का पालन किये बिना एक भारतीय नागरिक को दी गई सजा पर यदि अमल किया जाता है तो भारत के लोग और सरकार इसे एक सोची-समझी हत्या मानेंगे."
पाकिस्तान का कहना है कि उसने 3 मार्च 2016 को बालोचिस्तान में गिरफ्तार किया था. पाक अधिकारियों के मुताबिक जाधव ईरान से पाकिस्तान में घुसे थे. पाकिस्तान जाधव को भारतीय नौसेना का सक्रिय अधिकारी बताता है. उसका कहना है कि जाधव को भारत की जासूसी एजेंसी रॉ ने वहां तैनात किया था. पाकिस्तानी सेना ने जाधव का एक वीडियो भी जारी किया था जिसे उनका 'कबूलनामा' कहा गया.
भारत ने माना है कि जाधव भारतीय नौसेना में काम करते थे लेकिन भारत सरकार के मुताबिक उसका जाधव से कोई संपर्क नहीं है.
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