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भारतीय प्रधानमंत्री मोदी का दावा, देश में कोई हिरासत केंद्र नहीं है

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दावा विवादों में घिर गया है कि भारत में अवैध आप्रवासियों के लिए कोई हिरासत केंद्र नहीं बनाया गया है.

CAA protest
ऑस्ट्रेलिया में कुछ लोगों ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन किया. Source: SBS Hindi

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रविवार को दिल्ली में एक जनसभा में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत में कोई हिरासत केंद्र नहीं है. रामलीला मैदान में एक चुनावी रैली में मोदी ने कहा, “किसी मुसलमान को हिरासत केंद्र में नहीं भेजा जा रहा है. ना ही भारत में कोई हिरासत केंद्र है.”

मोदी ने कहा कि डिटेंशन सेंटर की अफवाह विपक्षी कांग्रेस ने उड़ाई है. उन्होंने कहा, “अर्बन नक्सल ये अफवाह फैला रहे हैं कि सारे मुसलमानों को डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जाएगा. मैं हैरानू हूं कि इस अफवाह पर अच्छे अच्छे पढ़े लिखे लोग भी पूछ रहे हैं कि ये डिटेंशन सेंटर क्या होता है. कैसा झूठ! कुछ तो अपनी शिक्षा की कद्र कीजिए. एक बार पढ़ तो लीजिए कि संविधान संशोधन और एनआरसी है क्या.”

"अब भी जो भ्रम में हैं, मैं उन्हें कहूंगा कि कांग्रेस और अर्बन नक्सलियों द्वारा उड़ाई गईं डिटेंशन सेंटर की अफवाहें सरासर झूठ हैं. बदइरादे वाली हैं. देश को तबाह करने वाले इरादों से भरी पड़ी हैं.”

“कोई देश के मुसलमानों को ना डिटेंशन सेंटर में भेजा जा रहा है, ना हिंदुस्तान में कोई डिटेंशन सेंटर है. यह सफेद झूठ है.”

भारतीय प्रधानमंत्री के इस दावे के विरोध में कुछ लोगों ने ट्विटर पर कथित सबूत पेश करते हुए बताया है कि भारत सरकार हिरासत केंद्र बनवा रही है. कुछ अखबारों की कतरनों के साथ कांग्रेस ने ट्वटिर पर लिखा है कि पीएम मोदी क्या ऐसा सोचते हैं कि भारत के लोग उनके झूठ की पड़ताल के लिए सामान्य गूगल सर्च भी नहीं कर सकते.

कांग्रेस का ट्वीट है, “हिरासत केंद्र अत्यंत सत्य है और जब तक यह सरकार सत्ता में रहेगी, बढ़ते रहेंगे.”

पिछले महीनों में कई ऐसी रिपोर्टें आई हैं जिनमें भारत के उत्तर पूर्व में हिरासत केंद्र बनाए जाने की बात कही गई है. एनडीटीवी ने सितंबर में अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि ढाई हेक्टेयर में सात फुटबॉल मैदानों के आकार वाला एक हिरासत केंद्र बनाया जा रहा है. इस रिपोर्ट के मुताबिक गुवाहाटी से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर गोलपाड़ा में भारत के पहले हिरासत केंद्र का निर्माण पूरे जोरों पर है.

सितंबर में ही अल जजीरा न्यूज चैनल ने भी अपनी एक डॉक्युमेंट्री में इस हिरासत केंद्र का वीडियो दिखाया था.

प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर सवाल करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने ट्विटर पर संसद में गृह मंत्रालय के एक बयान का हवाला दिया है.

भारद्वाज ने लिखा है, “प्रधानमंत्री कहते हैं कि कोई हिरासत केंद्र नहीं है. लेकिन जुलाई 2019 में लोकसभा को दिए गृह मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि असम में छह हिरासत केंद्र हैं. एक अन्य जवाब में बताया गया है कि सरकार ने गोलपड़ा में हिरासत केंद्र को मंजूरी दी है जिस पर 46.5 करोड़ रुपये खर्च होंगे.”

भारत में बड़ी संख्या में लोग नए नागरिकता संशोधन कानून और नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) का विरोध कर रहे हैं. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली की अपनी रैली में कहा कि उनकी सरकार किसी दुर्भावना से काम नहीं कर रही है.

उन्होने कहा, "जो हिंदुस्तान की मिट्टी के मुसलमान हैं, जिनके पुरखे मां भारती की संतान हैं. भाइयों और बहनों, उनसे नागरिकता क़ानून और एनआरसी दोनों का कोई लेना देना नहीं है.”

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