कोरोनावायरस के इलाज पर ट्रोल हुआ भारत सरकार का आयुष मंत्रालय

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए एक एडवाइज़री जारी की है, जिसमें लोगों को होम्योपैथी, यूनानी और आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करने की अपील की गई है. लेकिन इसके बाद आयुष मंत्रालय को ट्विटर यूज़र्स ने खूब ट्रोल किया.

India's Ministry of Ayush on Coronavirus

Source: Getty Images/Roger Harris/Science Photo Library

कोरोनावायरस का ख़तरा पूरे विश्व में फैला है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस संक्रमण को वैश्विक आपदा करार दिया है. चीन में कई लोगों की मौत हो चुकी है.

हज़ारों लोग संक्रमित हैं.. ऑस्ट्रेलिया में भी कई मामलों की पुष्टि हो चुकी है. भारत में भी 31 जनवरी तक एक मामला सामने आया था.

हालांकि इस वायरस से संक्रमित लोगों को सहायक उपचार दिया जा रहा है लेकिन इस वायरस के संक्रमण को ख़त्म करने का पुख्ता टीका या कोई दवा अब तक नहीं खोजी जा सकी है.

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में डोहार्टी इन्सटिट्यूट के वैज्ञानिकों ने एक संक्रमित शख्स से लिए गए नमूने से कोरोनावायरस को लैब में विकसित करने का दावा किया जिससे कि उम्मीद जताई जा रही है कि इस वायरस का वैक्सीन बनाने में मदद मिल पाएगी.

भारत की बात करें तो चिंता वहां भी है और चीन के वुहान प्रांत से भारतीय नागरिकों को वापस निकाल कर लाया गया है.

साथ की लोगों से वायरस के संक्रमण को लेकर सावधानी बरतने की बात कही गई है.

इस बीच भारत के आयुष मंत्रालय ने कोरोनावायरस से बचने के लिए एक एडवायज़री जारी की है ये एडवायज़री भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की तरफ से जारी की गई है.

एडवाइज़री में कोरोना वायरस से बचने के लिए होम्योपैथी और यूनानी दवाओं के नाम बताए गए हैं.

हालांकि एडवायज़री को लेकर सरकार के आयुश मंत्रालय को खूब ट्रोल किया जा रहा है.

एडवाइज़री में सलाह दी गई है कि कोरोना वायरस के ख़तरे से बचने के लिए आर्सेनिकम एल्बम 30 नाम की होम्योपैथी दवा तीन दिन तक खाली पेट लें.

इसमें ये भी बताया गया है कि घरेलू उपचार भी कोरोना वायरस के रोकथाम में सहायक हो सकते हैं.

  • कुछ आयुर्वेदिक दवाओं का ज़िक्र भी इस एडवाइज़री में है. जैसे हरीतकी, संशमन वटी, त्रिकटु चूर्ण आदि.
  • इसके अलावा शरबत उन्नाब तिर्यकअर्ब, हब्ब-ए-इक्शीरबुखार जैसी यूनानी दवाओं का भी ज़िक्र किया गया है.

पीआईबी के ट्वीट में जारी इस एडवाइज़री को काफी ट्विटर यूज़र ट्रोल कर रहे हैं.

एक यूज़र अवतार आंग ने लिखा है कि हमारे आयुष मंत्री को क्यों ना चीन भेजा जाए ताकि वो भारत में दी जा रही सलाह को साबित कर सकें.

श्रुति चतुर्वेदी नाम से एक और यूज़र ने लिखा है कि, सरकार की ओर से ज़बरदस्त गलत जानकारी दी जा रही है. उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस एक बहुत नया वायरस है और हज़ारों साल पुराना विज्ञान कैसे इस इलाज़ कर सकता है.

सानिया नाम से एक यूज़र ने लिखा है कि हमें शर्मिंदा करना बंद करें. वो लिखती हैं कि पूरी दुनिया देख रही है.

भारत की विपक्षी पार्टियों ने भी इन दिशानिर्देशों का विरोध किया है और इसे भ्रामक बताया है.

सीपीआई एम ने जनता से विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों को पालन करने की सलाह दी है.

हालांकि डॉक्टर उज़मा राज़वी नाम से एक यूज़र का कहना है कि ये एलोपैथ के लिए ये एक अजीब से स्थिति है.

उनका कहना है कि वो इस बारे में आश्वस्त नहीं है कि होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञ नहीं हैं और ये नहीं कह सकते कि इनके ज़रिए कोरोनावायरस का इलाज हो सकता है या नहीं लेकिन अगर आप किसी वायरस से संक्रमित हैं तो एलोपैथ आपके लिए सबसे सही चुनाव होगा.

इसी तरह सिडनी के डॉक्टर दीपक राय का भी कहना है कि होम्योपैथी या यूनानी चिकित्सा पद्धति के बारे में वो नहीं जानते लेकिन वो कहते हैं कि ये वायरस बहुत नया है और अभी इसका उपचार ढूंढा जा रहा है. 

सिडनी के सबअर्ब वेस्टमीड में वेस्टमीड मेडिकल सेंटर से डॉक्टर मनमीत मदान भी इस बात की तस्दीक करते हैं और मानते हैं कि ये पद्धतियां असरकारक होंगी इसके कोई सबूत नहीं हैं. हालांकि वो कहते हैं कि जो इन्हें आज़माना चाहे वो ऐसा कर सकता है. क्योंकि इसके बहुत बुरे प्रभाव नहीं होते. 

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वैधानिक चेतावनी – सूचित किया जाता है कि इस अंश में दी गई जानकारियां सामान्य हैं और ये किसी विशेष मामले के लिए नहीं हैं. अगर आप अपनी स्थिति के मुताबिक सटीक जानकारी चाहते हैं तो आप अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं.


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4 min read

Published

By Gaurav Vaishnava


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