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ईवीएम का गलत बटन दबाया तो काटी अपनी उंगली

भारत में चुनाव चल रहे हैं दूसरे चरण के चुनाव के बाद एक दर्दनाक और अनोखी घटना सामने आई है एक मतदाता ने ग़लत वोट डालने के बाद अपनी हाथ की उंगली काट डाली.

Pawan_Voter who chopped his finger
Source: Supplied

उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर के शिकारपुर विधानसभा में गाँव अब्दुल्लापुर हुलासन निवासी पवन कुमार ने अपनी बाएँ हाथ की ऊँगली को वोट देने के बाद काट दिया. कारण ये बताया कि उसने बहुजन समाज पार्टी के कैंडिडेट को वोट देने के लिए हाथी चुनाव निशान निशान के बजाए भारतीय जनता पार्टी के कैंडिडेट के निशान कमल के फूल पर बटन दबा दिया. इस बात से वो इतना ग्लानि से भर गया कि प्रायश्चित करने के लिए अपने उलटे हाथ की ऊँगली जिसपर स्याही लगायी गयी थी उसको एक गंडासे से काट डाला. भारत में वोट डालने के बाद बायें हाथ की इंडेक्स फिंगर पर अमिट स्याही लगायी जाती है जो जल्दी नहीं छूटती. ये इस वजह से किया जाता हैं कि दोबारा वोट ना डाला जा सके और एक पहचान हो जाये.

 परिजनों को पता चलने पर हडकंप मच गया. उसको लेकर अस्पताल गए जहाँ पर मरहम पट्टी की गयी. हालांकि ये भी बताया जा रहा है कि पवन का मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है.  

पवन आर्थिक तौर पर कमज़ोर परिवार से ताल्लुक रखता है.  उसके भाई मज़दूरी करते हैं इस घटना के बाद परिवार सदमे में है. मानसिक रूप से ठीक न होने के कारण पवन से बात नहीं हो पाई लेकिन उनके भाई विनोद ने पूरी घटना के बारे में बताया कि उसे हाथी का निशान नहीं दिखा और फिर वो स्याही मिटाने लगा कि दुबारा डालूँगा वोट लेकिन स्याही मिटी नहीं तो उसने गंडासे से ऊँगली काट डाली.

इस बात की चर्चा मीडिया में आने के बाद हर तरफ होने लगी. सोशल मीडिया पर भी ये खबर और विडियो वायरल हो गया. बसपा के नेता आकाश आनंद जो बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे हैं उन्होंने अपने पेज के माध्यम से अपील की कि किसी भी स्थिति में खुद को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए.

भारत में अक्सर ऐसा होता रहा हैं. दक्षिण के राज्यों में लोगो में अपने नेता के प्रति दीवानगी इस हद तक होती हैं कि वो अपने नेता के मंदिर बना लेते हैं. उनकी मृत्य पर आत्महत्या तक कर लेते हैं. ऐसी घटनाएं जयललिता और वाई एस आर रेड्डी के मृत्य पर सामने आई हैं. हालांकि चिकित्सक ऐसे लोगो को मनोरोगी मानते हैं और कहते हैं इनको इलाज कि ज़रुरत हैं. लखनऊ में डॉ राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में कार्यरत मनोचिकित्सक डॉ देवाशीष बताते हैं कि कहीं ना कहीं ऐसे लोग मनोरोगी होते हैं.


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Published

By Faisal Fareed


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