जानिए बैंकिंग रॉयल कमीशन सिफारिशें आपको कैसे प्रभावित कर सकती हैं?

बैंकिंग रॉयल कमीशन की 76 सिफारिशों के बारे में आपने ज़रूर सुना होगा। ऑस्ट्रेलियाई सरकार और विपक्ष दोनों ही और से इन सिफारिशों का स्वागत किया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन सिफारिशों के कानून की शक्ल में आने पर आप पर क्या असर पड़ेगा। हालांकि अभी ये कहा नही जा सकता कि कानूनी तौर पर ये सिफ़ारिशें कैसे सामने आएंगी।

banking royal commission

Source: AAP

बैंकिंग रॉयल कमीशन ने ऑस्ट्रेलियाई बैंकिंग प्रणाली में सुधार को लेकर 76 सिफारिशें दी हैं. केंद्र की साझा सरकार ने कहा है कि वो इन सभी सिफारिशों में से लगभग सभी को कानून की शक्ल देकर लागू करने की कोशिश करेंगे. हालांकि इन सिफारिशों में आम ग्राहकों के लिए क्या कुछ है ये जानने के लिए हमने बात की  गेन होम लोन्स के डायरेक्टर नवजीत सिंह मट्टा से.

नवजीत सबसे पहले तो बैंकिंग कमीशन की रिपोर्ट को नाकाफ़ी मानते हैं। वो कहते हैं कि बैंकिंग के क्षेत्र में बहुत खामियां हैं जिनपर काम किया जा सकता था। हालांकि वो मानते हैं कि कमीशन की सिफारिशों में कुछ ऐसी बातें भी हैं जो कि ग्राहकों के लिए फायदेमंद हैं. मसलन कि इसमें बैंक को केवल प्रोडक्ट बेचने पर ही ध्यान देने के लिए नही. बल्कि ग्राहकों को अच्छी सेवा देने के लिए भी कहा गया है. 

ऑस्ट्रेलिया में लोन यानी ऋण के बारे में बारे में नवजीत कहते हैं कि काफी बड़े अनुपात में ग्राहक ब्रोकर के ज़रिए लोन के लिए जाते हैं. बैंकिंग रॉयल कमीशन के सिफारिशों में सुझाव दिया गया है कि ग्राहक ही ब्रोकर को उसकी फीस दें जो कि पहले लोन देने वाले बैंक या संस्थाएं दिया करते थे. नवजीत इसे ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ की तरह देखते हैं. 

हालांकि नवजीत मान रहे हैं कि ये सिफारिशें नहीं लागू करने के लिए सरकार पर दबाव है लेकिन उन्हें एक और बात से गुरेज़ है कि इन सिफारिशों में ब्रोकर को मिलने वाली ट्रेल कमीशन को भी बंद करने की बात कही गई हैं. नवजीत कहते हैं कि लोन दिलवाने के बाद भी ब्रोकर अपनी डील की समीक्षा करते रहते हैं. नवजीत का कहना है कि इस तरह से ब्रोकर्स को तो नुकसान होगा ही जबकि छोटे बैंक का ऑप्शन भी ग्राहकों से दूर होता जाएगा. 


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2 min read

Published

By गौरव वैष्णव



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