कार्यक्रम ऑस्ट्रेलियन फ़िल्म, टेलीविज़न और रेडियो स्कूल के थिएटर में आयोजित किया गया था जहां न केवल लोगों को शबाना और अनुपम के बारे में कई सारी बातें जानने को मिली वहीं कई मुद्दों पर लोगों ने अपने सवाल भी पूछे.
कैसे तय किया फर्श के अर्श का सफ़र
शबाना और अनुपम ने बताया कि उन दोनों का ही बचपन बहुत समृद्ध नहीं था। लेकिन अभिनय के प्रति उनकी दीवानगी और समर्पण ने उन्हें यहां तक पहुंचाया है.

शबाना जहां माता-पिता के सहयोग से अपनी मुकाम तक पहुंचने की कोशिश करती रही वहीं अनुपम ने मां मंदिर से पैसे चुराकर पहला ऑडिशन दिया जिसमें वो सफल भी रहे.
आसान नहीं था काम पाना
शबाना ने बताया कि कई बार किस्मत ने उनका साथ दिया लेकिन जब-जब उनको मौका मिला उन्होंने साबित किया कि वो वाकई अभिनय और फ़िल्मी दुनिया के लिए बनीं हैं. एक दौर ऐसा भी आया कि वो एक साथ कई-कई फ़िल्में कर रहीं थी.

उधर पहली ही फ़िल्म में बूढ़े शख्स का किरदार निभाने वाले अनुपम बताते हैं कि वो किरदार मिलना भी इतना आसान नहीं रहा. उसके लिए वो महेश भट्ट तक से भिड़ गए थे. अपने काम के बारे में बोलते हुए वो बताते हैं कि उन्होंने कई संजीदा किरदार निभाए तो कई हल्के-फुल्के भी. उनके लिए मंज़िल से ज्यादा रास्तों का आनंद मायने रखता है.
पद्मावती विवाद पर राय
हालांकि पद्मावती विवाद पर अनुपम ने अपनी कोई स्पष्ट राय नहीं दी लेकिन उन्होंने मीडिया पर इल्ज़ाम लगाते हुए ये ज़रूर कहा कि मीडिया नकारात्मक बातों को ज्यादा तवज्जो देता है जबकि ज्यादा लोगों की तादाद पद्मावती फि़ल्म को देखना चाहती है.

उधर शबाना ने कहा कि पहले ही विवाद शुरू करना ठीक नहीं उन्होंने कहा कि फ़िल्म पर फैसला लेने का हक़ सिर्फ सेंसर बोर्ड को है और अगर कोई विरोध में हिंसा करता है तो कानून को अपना काम करना चाहिए.
