गुरुवार को जम्मू और कश्मीर राज्य के बंटवारे की औपचारिकता पूरी हो गई. तीन महीने पहले अगस्त में भारत सरकार ने राज्य को विशेष दर्जा देने वाली संविधान की धारा 370 को खत्म कर दिया था.
5 अगस्त को हुए इस ऐलान के बाद भारत प्रशासित कश्मीर में कई तरह की पाबंदियां लगाई गई थीं. इनमें से कुछ पाबंदियां अब भी जारी हैं.
गुरुवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के मौके पर उनकी विशाल मूर्ति के सामने बोलते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कश्मीर का भविष्य उज्ज्वल है.
मोदी ने कहा, "कश्मीर एकमात्र ऐसी जगह है जहां पिछले तीन दशक में आतंकवाद के कारण 40 हजार लोगों की जान गई. कितनी ही मांओं ने अपने बेटे खो दिए. कब तक हम ऐसे मासूमों को मरते देखते रहेंगे?"
उन्होंने कहा, "आज से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख एक नए भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं. लद्दाख और जम्मू-कश्मीर एक उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम उठा रहे हैं."
नए प्रावधान के तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश होंगे.
हालांकि इसके साथ ही स्थानीय अधिकारियों ने दसियों हजार सैनिकों की तैनाती की और हाई अलर्ट जारी कर दिया है.
अब भी सैकड़ों कश्मीरी नेता और आम नागरिक हिरासत में हैं. ज्यादातर पर कोई मुकदमा भी दर्ज नहीं किया गया है. इंटरनेट सेवाएं अब भी बहाल नहीं की गई हैं.
जिनीवा में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयुक्त ने हालात पर चिंता जताई है. मंगलवार को एक बयान में आयुक्त ने कहा, "हम भारतीय अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि तालाबंदी हटाई जाए और लोगों के सारे अधिकार लौटाए जाएं."
