ऐसी खबरें हैं कि इन ट्रेनों के डिजाइन में खामियां हैं और मामला अब ऑस्ट्रेलिया के मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है.
क्वीन्सलैंड की सरकार ने इस योजना पर 4.4 अरब डॉलर खर्च किए हैं. इसके तहत कनाडा की कंपनी बॉम्बार्डियर ने भारत में ट्रेनों का निर्माण किया है. लेकिन अब ये ट्रेनें कानूनी मुश्किल में फंस गई हैं क्योंकि इनके डिजाइन पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
द कूरियर मेल ने रिपोर्ट छापी है कि विकलांगों के लिए बनाए गए विशेष टॉयलेट्स में वील चेयर्स की जगह ठीक नहीं है.
पांच साल पहले क्वीन्सलैंड ने 75 नई ट्रेनों का ऑर्डर दिया था. इनमें से 9 की डिलीवरी हो चुकी है. इन ट्रेनों का कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान यात्रियों के लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल होना है.
लेकिन लोगों को दिक्कतें हो रही हैं. ब्रिसबेन की वील चेयर इस्तेमाल करने वाली एक यात्री ने फेयरफैक्स मीडिया को बताया कि वह इन ट्रेनों के इस्तेमाल के खिलाफ कोर्ट जाने पर विचार कर रही हैं.
इस बारे में क्वीन्सलैंड सरकार ने मानवाधिकार आयोग से छूट देने का अनुरोध किया था जिसे आोयग ने खारिज कर दिया. आयोग ने सरकार को फैसले के लिए 16 मार्च तक का वक्त दिया है.
क्वीन्सलैंड के ट्रांसपोर्ट और मेन रोड्स मिनिस्टर मार्क बेली ने न्यूज डॉट कॉम को बताया कि सरकार विकलांगों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं के साथ मिलकर समस्या का हल निकालने की कोशिश कर रही है.
उन्होंने कहा, "इसमें कोई दोराय नहीं है कि पिछली सरकार के दौरान पास हुआ यह डिजाइन स्वीकार किए जाने लायक ही नहीं है."
मंत्रालय की वेबसाइट पर बताया गया है कि इस खामी को ठीक होने में 18 से 24 महीने का वक्त लग सकता है.
