राजधानी कैनबरा में.. गुरुवार को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कृषि व्यापार के क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई एक रिपोर्ट पेश की गई. इस रिपोर्ट का मक़सद कृषि के क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापार पर जमी बर्फ पिघलाने की कोशिश था.
रिपोर्ट की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस रिपोर्ट के जारी करने के मौके पर देश के उपप्रधानमंत्री माइकल मैककॉर्मैक के प्रतिनिधि, मिनिस्टर फॉर ट्रेड सिमोन बर्मिंघम, मिनिस्टर फॉर एग्रीकल्चर डेविड लिटिल प्राउड और शेडो एग्रीकल्चरल मिनिस्टर मार्क फित्ज़गिबॉन के साथ ऑस्ट्रेलिया में भारत के हाई कमिश्नर डॉक्टर अजय गोन्डाने भी मौजूद थे.

क्या हैं कृषि व्यापार से संबंधित परेशानियां ?
ये रिपोर्ट वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार की गई है. रिपोर्ट के लेखक प्रोफेसर ब्रजेश सिंह बताते हैं कि दरअस्ल मामला कुछ पेचीदा है. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापारिक संबंध अच्छे ख़ासे हैं. व्यापार भी लगातार बढ़ रहा है. लेकिन कहीं कोई अड़चन है तो वो हैं कृषि व्यापार. अड़चन इस बात की है कि ऑस्ट्रेलिया भारत जैसे बड़े बाज़ार में अपने कृषि उत्पादों के लिए बड़ी भागीदारी चाहता है जबकि भारत के लिए ये भागीदारी देना आसान नहीं है वो भी ऐसे में जबकि भारत में करीब 60 फीसदी लोग कृषि आधारित रोज़गार से जुड़े हों और अनाज के स्टोरेज जैसी सुविधा बढ़ाकर भारत खुद एक बड़े निर्यातक की भूमिका तलाश रहा हो.
रिपोर्ट के सुझाव
जारी की गई रिपोर्ट कई मायनों में अहम है, दरअस्ल इस रिपोर्ट के ज़रिए ये बताने की कोशिश की गई है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अच्छे व्यापारिक संबंध केवल एक दूसरे के बाज़ार में उत्पाद बेचने तक सीमित नहीं होने चाहिए. खास तौर पर कृषि के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच कई और संभावनाएं भी हैं. जिनमें महत्पूर्ण है तकनीक का आदान प्रदान.
साथ ही पारंपरिक अनाज के व्यापार के अलावा कुछ ऐसे उत्पादों का बाज़ार भी तलाशा जा सकता है जो इन दोनों देशों की ख़ासियत हो या फिर जो ज़रूरत हो. इस बारे में बात करते हुए हाईकमिश्नर अजय गोंडाने कहते हैं कि भारत में कई ऐसे उत्पादों की मांग बढ़ रही है जिसे आस्ट्रेलिया पूरी कर सकता है. इनमें अखरोट, एवाकाडो, बेरीज़, और वाइन शामिल हैं.
ये ही नहीं रिपोर्ट में शोध को साझा करके एक दूसरे को फायदा पहुंचाने की बात भी कही गई है. साथ ही सभी सुझावों को मूर्त रूप देने के मकसद से ऑस्ट्रेलिया-इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एग्री बिज़नेस जैसे एक केंद्र को स्थापित करने की जरूरत भी व्यक्त की गई है.

योजनाओं को ज़मीन पर उतारने की ज़रूरत
आस्ट्रेलियाई नेताओं ने भी भारत और ऑस्ट्रेलिया के व्यापारिक रिश्तों की तारीफ़ की लेकिन साथ ही ये भी कहा गया कि अब हनीमून पीरियड खत्म हो चुका है. वक्त ज़मीनी तौर पर योजनाओं को आगे बढ़ाने का है.
उप प्रधानमंत्री माइकल मैक कॉर्मेक ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापारिक संबंधों का बढ़ाने के इस प्रयास की सराहना की है. उन्होंने कहा कि
“दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ने का सीधा फायदा दोनों देशों के नागरिकों को मिलेगा”
मिनिस्टर फॉर ट्रेड सिमोन बर्मिंघम ने कहा कि
“इस बात को समझा जा सकता है कि भारत एक उभरती हुई आर्थिक ताक़त है और ऐसे में भारत भी अपनी कई इच्छाएं हैं ऐसे में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच नए आयाम तलाशे जाने की ज़रूरत है.”
उधर कृषि मामलों के मंत्री डेविड लिटिल प्राउड कहते हैं कि
“ऑस्ट्रेलिया और भारत बड़े महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं और ऐसे में अगर हम कृषि संबंधित व्यापार में सहयोग कर सकें तो हम और अच्छा भविष्य तैयार कर सकते हैं.”
