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कहानी, एक छोटी सीः प्राइवेट इन्वेस्टिगेटर

पढ़िए, अशरफ शाद की लिखी कहानी...

Kumud Merani
Source: SBS

4 min read

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मुंबई की अपर क्लास में आशी वर्मा पीआई के ऐड्स ने सनसनी दौड़ा दी थी. किटी पार्टीज, कॉकटेल ईवनिंग्स और ब्रिज टेबल्स पर औरतें एक-दूसरे के कानों में आशी वर्मा के नाम की सरगोशियां करती थीं. बीवियों से बेवफाई करने वाले शौहर परेशान कि यूरोप और अमेरिका का लफड़ा यहां भी शुरू हो गया. उनकी बीवियां प्राइवेट इन्वेस्टिगेटर हायर करने लगीं तो क्या होगा. उन्हें हैरानी थी कि किसी को प्राइवेट इन्वेस्टिगेटर का लाइसेंस मिला कैसे.

 

मोतीवाला एक प्रॉपर्टी डीलर था. उसके दफ्तर जाने के बाद उसकी बीवी जौहरा बाई ने अखबार पढ़ते हुए आशीवर्मा पीआई का ऐड्स पढ़ा तो काफी देर तक कुछ सोचती रही और फिर अपने मोबाइल से ऐड में दिया हुआ नंबर डायल करने लगी.

दो घंटे बाद जौहरा बाई आशी वर्मा के दफ्तर में उसके सामने बैठी हैरान हो रही थी कि ये औरत पीआई क्यों बनी, इसे तो मॉडल या एक्ट्रेस होना चाहिए था.

'आपने अपना मसला नहीं लिखा', आशी ने वो फॉर्म देखा जो उसकी सेक्रटरी ने जौहरा बाई से भरवाया था.

'मेरा मसला ये है कि मेरा कोई मसला नहीं है. मैं चाहती हूं कि आप मेरे लिए कोई मसला ढूंढ़ें', जौहरा बाई ने झिझकते हुए कहा, 'मेरे दोस्त मुझे अफसोस भरी नजरों से देखती हैं कि मेरे पास सुनाने के लिए कोई कहानी नहीं है. उन सबका, मेरी दोस्तों का कोई ना कोई मसला है. किसी का शौहर शराबी है, किसी का जुआरी है और किसी ने कीप रखी हुई है. किसी की बेटी या बेटा दूसरी जात में शादी करना चाहते हैं. मेरा एक बेटा है जो अमेरिका पढ़ने गया हुआ है. वो सिर्फ पढ़ाई करता है और कुछ नहीं. मेरा शौहर भी सिर्फ एक पैसा बनाने वाली मशीन है. दिनभर करोड़ों के सौदे करता है और शाम को घर आकर मेरे साथ टीवी के ड्रामे देखता है. मुझे एक चैलेंज चाहिए. कोई औरत मेरा शौहर छीनने की कोशिश करे और मैं उसे कान पकड़कर वापस घर ले आऊं.'

आशी वर्मा ने दो हफ्तों में जौहरा बाई का मसला हल कर दिया. वह मोतीवाला से लंदन की एक मालदार बेवा बनकर मिली जिसे प्रॉपर्टीज में इन्वेस्टमेंट करनी थी. मोतीवाला उसे प्रॉपर्टी दिखाने, फिर कॉफी पिलाने और उसके बाद डिनर कराने ले गया. आशी वर्मा ने इस तरह उसकी हौसलाअफजाई की थी कि तीसरी डिनर डेट पर उसने प्रपोज कर दिया. आशी न साफ कहा कि जिस दिन अपनी बीवी को तलाक देकर आओगे, शादी कर लूंगी.

अगली सुबह नाश्ते की टेबल पर मोतीवाला ने जौहरा बाई को कागज दिया.

'यह क्या है?' जौहरा बाई ने पूछा, जो कुछ दिनों से मोतीवाला में तब्दीलियां नोट कर रही थी.

'डिवोर्स. मैं तुझे तलाक देकर दूसरी शादी कर रहा हूं. तू फिक्र ना कर. यह मकान तेरे नाम लिख दिया है. गाड़ी दूंगा. और लाख रुपये महीना खर्चा-पानी का. मैं शाम को कागज लेने आऊंगा. तूने साइन नहीं किए तो कोर्ट जाऊंगा. फिर तुझे कुछ नहीं मिलेगा.'

जौहरा बाई की दुनिया में अंधेरा छा गया. वह एक घंटे बाद आंसू बहाती हुई आशी वर्मा के सामने बैठी थी. आशी वर्मा ने उससे एक नए केस की फीस ली और वो फोन निकाला जिसका नंबर मोतीवाला के पास था.

'मैं अब तुमसे शादी नहीं कर सकती. मैं एयरपोर्ट पर हूं और लंदन वापस जा रही हूं. मेरा प्रॉपर्टी का कोई घपला है. अब इंडिया वापस नहीं आऊंगी.' यह मेसेज भेजकर आशी ने फोन से सिम निकाल कर तोड़ दी और एक नई सिम डालने लगी.

मोतीवाला ने अपनी बीवी को ढूंढने की बहुत कोशिश की. उसे यकीन था कि आशी वर्मा प्राइवेट इन्वेस्टिगेटर उसकी मदद कर सकेगी. वह उसके दफ्तर पहुंचकर अभी उसकी सेक्रेट्री से बात कर ही रहा था कि आशी वर्मा अपने कमरे से बाहर निकली.

"तुम!!" दोनों के मुंह से एक साथ निकला. और कुछ देर के लिए अपनी जगह जमकर रह गए।


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