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"कला में है नस्लीय भेदभाव का हल"

श्यामला बचपन में कई बार नस्लीय भेदभाव का शिकार हुईं थीं, इस बात ने उन्हें प्रेरित किया कि वो नस्लीय भेदभाव के शिकार लोगों के लिए कुछ कर सकें. वो कहती हैं कि उपेक्षित लोगों को उनके लिए किए जा रहे फैसलों में शामिल किया जाना चाहिए. कला को वो भेदभाव कम करने का एक बड़ा ज़रिया मानती हैं वो कहती हैं "आर्ट कैन चेंज हार्ट"

Shyamala Ishwaran_IABCA Finalist_Dancer
Source: Supplied

समाज में एक मुकाम पाने के लिए हर किसी की कोशिश जारी रहती है. हालांकि कहते हैं कि कोशिशें ज्यादा मायने रखती हैं.. लेकिन जब कोशिशें सफल होती हैं तो उसका अपना ही मज़ा होता है.  और अगर आपकी सफलता किसी सम्मान के साथ सराही जाती है तो उसकी सार्थकता समझ आती है.

Shyamala Ishwaran_IABCA Finalist_Dancer
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समाज के ऐसे ही कुछ सफल लोगों के आपको मिलवा रहे हैं, जो इस साल इंडिया ऑस्ट्रेलिया बिज़नेस एंड कम्यूनिटी अवॉर्ड्स के फाइनलिस्ट हैं. इसी कड़ी में यहां मिलिए एक महिला परफॉर्मिंग आर्टिस्ट और डांसर श्यामला ईश्वरन से.

श्यामला की पैदाइश सिडनी की ही है लेकिन उनकी जड़ें फिजी और भारत तक जाती हैं. वो बताती हैं कि वो चार साल की थीं जब उन्होंने नृत्य सीखने की शुरूआत की थी. हालांकि श्यामला बताती हैं कि उन्होंने कभी भी नृत्य को पूरी तौर पर अपनाने की नहीं सोची या इस क्षेत्र में अपना करियर बनाने की नहीं सोची ये तो बस खुद ब खुद होता गया.

श्यामला बताती हैं कि उनके रंग के कारण उन्हें बचपन में कई बार नस्लीय भेदभाव का शिकार होना पड़ा और इसकी छाप उनके मन में अभी तक है. वो कहती हैं,

मेरे प्राइमरी स्कूल में मैं और मेरा भाई ही भारतीय मूल के थे, और इस वजह से हमें कई बार नस्लीय भेदभाव का शिकार होना पड़ा
Shyamala Ishwaran_IABCA Finalist_Dancer
Source: Supplied

श्यामला का मानना है कि समाज के भेदभाव को कम करने के लिए सभी तबकों को प्रशासनिक सहभागिता दी जानी चाहिए और उनकी आवाज़ को हर फैसले में शामिल किया जाना चाहिए

लोग मुझसे पूछते हैं कि आदिवासियों की समस्या हल करने के लिए क्या किया जाना चाहिए. तो मैं कहती हूं कि समस्या मेरे साथ नहीं है। असल में उन लोगों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए जो शोषित या पीड़ित हैं.

इन गंभीर बातों के बीच हमने श्यामला के भारत से जुड़ाव के बारे में भी पूछ लिया. उन्होंने हमें बताया कि उनके पिता उनके पिता के साथ यहां आए थे और उनकी मां फिजी से हैं. जो भारत में आंध्र प्रदेश से है. हालांकि श्यामला को अफसोस है कि वो हिंदी नहीं सीख पाई.

आईएबीसीए अवॉर्ड में फाइनल तक के सफर के बारे में बताते हुए वो कहती हैं कि कुछ लोगों ने उनसे इस पुरस्कार को लेकर संपर्क किया. श्यामला को बहुत पुरस्कार तो नहीं मिले लेकिन वो कहती हैं कि सालों तक की गई मेहनत को अगर पहचान मिलती है तो अच्छा लगता है.

श्यामला मानती हैं कि कला समाज में बदलाव ला सकती हैं वो कहती हैं "आर्ट कैन चेंज हार्ट".


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Published

By गौरव वैष्णव


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