एनडीटीवी ने पुलिस सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सेना के खिलाफ अपहरण के आरोप लगाने के बारे में भी विचार हो रहा है. साथ ही सेना ने मामले की आंतरिक जांच भी शुरू कर दी है.
यह घटना पिछले हफ्ते की है. एक वीडियो सोशल मीडिया पर देखा गया था जिसमें एक व्यक्ति को सेना की जीप से बांधा गया था. राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मामले पर रिपोर्ट मांगी थी.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह घटना 9 अप्रैल की है जब श्रीनगर संसदीय क्षेत्र में उपचुनाव के दौरान पोलिंग अफसरों पर भीड़ पत्थरबाजी कर रही थी. एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि बांधे गए व्यक्ति की पहचान फारूक अहमद डार नाम के रूप में हुई है. जांच के दौरान डार ने अधिकारियों के सामने दावा किया कि जब वह वोट डालने के बाद अपनी बहन के घर जा रहा था, तब कुछ सैनिकों ने बीरवाह गांव के पास उसे पकड़ लिया. ये सैनिक चुनाव अधिकारियों के साथ बीरवाह गांव में जाना चाहते थे लेकिन प्रदर्शनकारी पथराव करते हुए विरोध कर रहे थे. ऐसा दावा है कि सैनिकों ने पथराव से बचने के लिए डार को जीप से बांध लिया.
उधर टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट है कि भारत सरकार ने सेना के उस अफसर के समर्थन का फैसला किया है, जो इस घटना में शामिल बताया जाता है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सेना ने 9 अप्रैल की घटना की जांच की है और यह निष्कर्ष निकाला है कि जब कमाडिंग ऑफिसर ने देखा कि उन्हें ऐसी गलियों से गुजरना है जहां भीड़ पथराव कर सकती है तो ना चाहते हुए भी युवक को ढाल बनाने का फैसला किया.
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