एनआरआई से शादी अगर लुभावनी तो लगती है लेकिन होती एक जुए की तरह होती हैं. ज़िन्दगी दांव पर होती हैं सिर्फ लड़की की.
नवतेज कौर चंडीगढ़ की रहने वाली एक आम लड़की हैं. उन्होंने भी ख्वाब देखे थे अपनी शादी के. लेकिन दो साल में सारे ख्वाब चकनाचूर हो गए. शादी हुई, दहेज के लिए झगडे और फिर एक दिन एनआरआई लड़का और उसका परिवार कनाडा चला गया. फिर कोई संपर्क नहीं और मांगने पर मिला डाइवोर्स. नवजोत लेकिन बहादुर निकली और लड़ गयी लेकिन इस लड़ाई में आज भी उनका समय कोर्ट के चक्कर लगाते बीतता हैं. खुद नवजोत बताती हैं कि ऐसे केस में लड़की न इस पार की रहती हैं न उस पार की. थोडा सा भी अगर समय ले लें और जांच कर लें तो इससे बचा जा सकता हैं.
बात सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं हैं. पुरे भारत में आपको ऐसे केस मिल जायेंगे.
भारत में ऐसे मामले बहुत बढ़ गए हैं. अमनजोत कौर रामूवालिया ऐसी लडकियों के हक की लड़ाई लड़ रही हैं. उनके पिता बलवंत सिंह रामूवालिया भारत में मानव संसाधन मंत्री रह चुके हैं और इस मामले के लिए प्रशासन और सरकार तक आवाज़ उठा चुके हैं और कई कठोर नियम भी बनवा चुके हैं. अमनजोत बताती हैं कि पेरेंट्स को भी थोडा सोचना चाहिए और कुछ छोटी छोटी सावधानियां आगे बहुत काम आ सकती हैं. एनआरआई से शादी हमेशा लुभावनी नहीं होती. उसका पासपोर्ट चेक करे, कहाँ काम करता हैं पता करे उसके पेपर्स अपने पास रखें सब कुछ वेरीफाई करे तब ही आगे बढे.
बात कुछ भी हो. सोचिये इसमें आपकी लड़की की ज़िन्दगी का सवाल हैं. सिर्फ पैसे के पीछे न भागिए. सामाजिक बुराई दहेज़ से दूर रहिये, लड़की की ख़ुशी को देखिये, बड़ो-बूढों की भी राय लीजिये, ज़रूरी नहीं कि एनआरआई लड़के से शादी करके ही ख़ुशी मिलेगी.
लखनऊ से फैसल फरीद
