47 साल के नल्ला मोहम्मद अब्दुल जमील पर धार्मिक भेदभाव फैलाने के आरोप लगाए गए थे. जमील ने अपना अपराध कबूल कर लिया था. उन पर 4000 सिंगापुर डॉलर्स का जुर्माना किया गया. उसके बाद जमील को डिपोर्ट कर दिया गया. समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक सिंगापुर की सरकार ने कहा कि बहु-धार्मिक समाज में ऐसी टिप्पणियों के लिए कोई जगह नहीं है और जमील को घर भेजा जाना चाहिए. सिंगापुर के गृह मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, "नल्ला ने जुर्माना चुका दिया है. अब उन्हें वापस भेजा जाएगा."
इमाम ने जनवरी में मस्जिद में एक भाषण के दौरान अरबी में कुछ टिप्पणियां की थीं. समाचार एजेंसी एएफपी ने लिखा है कि कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों के मुताबिक उनके भाषण में कहा गया था, "ईश्वर यहूदियों और ईसाइयों के खिलाफ हमारी मदद करे."
एक व्यक्ति ने इस भाषण का वीडियो फेसबुक पर पोस्ट कर दिया था जिसके बाद कानूनी कार्रवाई की गई.
सिंगापुर के मुस्लिम समाज ने भी इमाम जमील की इस टिप्पणी की आलोचना की है. स्ट्रेट्स टाइम्स अखबार के मुताबिक उन्हें डिपोर्ट किये जाने के फैसले पर मुस्लिम मामलों के मंत्री याकूब इब्राहिम ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि यह मुश्किल की घड़ी थी जिसने सही वक्त पर हमें या दिलाया कि संवेदनहीन होकर कही गईं बातें समाज को प्रभावित कर सकती हैं. सूचना मंत्री डॉ. याकूब ने कहा, "शब्द अहम होते हैं. ऐसे शब्दों की सिंगापुर में कोई जगह नहीं है जो विभिन्न समुदायों के बीच संदेह और डर पैदा करें."
सिंगापुर में ज्यादातर चीनी मूल के लोग रहते हैं लेकिन मलय मुस्लिम और भारतीय भी काफी बड़ी तादाद में हैं. एएफपी के मुताबिक इमाम जमील के मुकदमे पर फैसला सुनाते हुए डिस्ट्रिक्ट जज जसविंदर कौर ने कहा, "सिंगापुर ऐसे किसी व्यक्ति या समूह को इजाजत नहीं दे सकता कि भेदभाव बोये या दुश्मनी फैलाए. हमने इस समाज में धार्मिक और नस्ली सौहार्द बनाने के लिए बहुत मेहनत की है."
जज ने कहा कि आरोपी को अपनी करनी का काफी अफसोस है इसलिए वह सजा में सिर्फ जुर्माना लगा रही हैं. कानूनी कार्रवाई होने के बाद जमील ने विभिन्न धार्मिक नेताओं से मुलाकात की थी और माफी मांगी थी.
