अरुणा भारत में आंध्रप्रदेश के पश्चिमी गोदावरी ज़िले से ताल्लुक रखती हैं. ऑस्ट्रेलिया आने से पहले वो न्यूज़ीलैंड भी रह चुकी हैं. वो 1984 में भारत से न्यूज़ीलैंड आईं थीं और इसके दो साल बाद यानी 1986 में आस्ट्रेलिया पहुंची. हालांकि ऑस्ट्रेलिया में उनके पति एक व्यवसायी हैं लेकिन अरुणा कहती हैं कि वो काफी अरसे से सामाजिक कार्यों में ही लगी हैं. वो कहती हैं इसके अलावा उन्होंने अपने बच्चों की भी खूब खयाल रखा. साथ ही पति को भी उन्होंने यहां व्यवसाय चलाने में मदद की.
वो कहती हैं कि वो ऑस्ट्रेलिया में भारतीय संस्कृति को बढ़ाने के लिए हमेशा उत्साहित रहती हैं. इसके लिए उन्होंने गणेश उत्सव, दीवाली जैसे कई आयोजन किए हैं.
इस सवाल पर कि वो क्या मुद़्दे लेकर जनता के बीच जाना चाहती हैं? वो कहती हैं कि वो लेबर पार्टी से जुड़ने के पीछे उनका मकसद दोनों के मूल्यों में समानता है. उन्होंने कहा कि वो ज़रूरतमंदों की आवाज़ बनना चाहती हैं. अरुणा कहती हैं कि वो भारतीय बुज़ुर्ग लोगों के लिए उनकी संस्कृतियों के आधार पर एज्डकेयर होम बनाना चाहती हैं. ताकि वो हर कोई वहां सहजता से रहे. साथ ही वो रिटायरमेंट विलेज भी बनाना चाहती हैं. वो कहती हैं कि वो ज़रूरतों के आधार पर महिलाओं से जुडे मामलों को भी उठाना चाहती हैं.
अरुणा जलवायु परिवर्तन, बिजली की कीमतें, जनसेवा से जुड़ी चीज़ों के निजिकरण जैसे मुद्दों पर भी काम करना चाहती हैं. उन्होंने दावा किया कि अगर लेबर सरकार आती है तो वो एम4 मोटरवे से टोल हटा देंगे.
अपने चुनाव लड़ने के फैसले पर वो कहती हैं कि जब वो बड़े उत्सव आयोजित करती हैं. लोगों के साथ काम करती हैं तो लोग उनसे कहते हैं कि क्यों नहीं वो उनका प्रतिनिधित्व करती हैं. वो कहती हैं कि इसके लिए मुझे एक सही रास्ते की तलाश थी और इसीलिए उन्होंने लेबर पार्टी को चुना.
ज़ाहिर है अब अरुणा को चुनने का फैसला राज्य के वोटरों के हाथ में है लेकिन अपनी जीत के लिए अरुणा आश्वस्त दिखती हैं.
