खबर है कि गुरुवार को सुनवाई के दौरान प्रकाश ने इस्लामिक स्टेट में शामिल होने पर पछतावा जाहिर किया है. अपने बयान में प्रकाश ने कहा कि उसे सीरिया के रक्का में आईएस की ट्रेनिंग मिली और फिर वह कुर्दिश विद्रोहियों से लड़ने के लिए कोबान चला गया.
लड़ाई में घायल होने पर उसने शांत इलाके में भेजे जाने की गुजारिश की. तुर्की की एक समाचार एजेंसी के डोगन के मुताबिक प्रकाश ने बताया, “मैं रक्का गया और वहां मुझे लड़ने के लिए कहा गया. मुझे प्रचार के लिए जारी होने वाले वीडियो में बोलने को भी कहा गया.”
प्रकाश ने खुद को आईएस में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधि मानने से इनकार किया है. उसने कोर्ट से गुहार लगाई है कि उसे किसी मुस्लिम देश को दिया जाए, ना कि ऑस्ट्रेलिया को.
ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल तुर्की से नील प्रकाश के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया था. प्रकाश ने कोर्ट को बताया कि उसकी शुरुआती जिंदगी एक बौद्ध के रूप में कंबोडिया में गुजरी लेकिन आईएस के वीडियो देखने के बाद उसने इस्लाम अपनाने का फैसला किया.
