ऑस्ट्रेलियाई मूल का पॉल पिछले 40 साल से ऑस्ट्रेलिया में रह रहा था. हालांकि उसके पास कोई दस्तावेज नहीं थे. द हिंदू अखबार ने खबर दी है कि आंध्र प्रदेश और ओडिशा में बाल यौन शोषण के कई मामलों में पॉल को सजा सुनाई गई है.
पॉल को जमानत मिल गई है. खबर है कि वह हाई कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है.
72 साल के पॉल ने फर्जी पादरी और डॉक्टर का रूप धरकर दुष्कर्म किए.
पॉल को अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के मामले में आईपीसी की धाराओं के तहत विशाखापत्तम की रेलवे कोर्ट ने सजा सुनाई है. अश्लीलता के प्रदर्शन के आरोप में एक साल की सजा है जबकि पासपोर्ट ऐक्ट और फॉरनर्स ऐक्ट में दो साल की जेल दी गई है.
पॉल पर 32 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.
पॉल ने पादरी बनकर कई ईसाई संस्थाओं के साथ काम किया जहां उसने कई अनाथ बच्चों का यौन शोषण किया. विशाखापत्तम पुलिस ने उसे 2001 में ऐसे ही आरोपों में गिरफ्तार किया था लेकिन तब उसे जमानत मिल गई थी.
उसके बाद पॉल ओडिशा के मुनिगुड़ा चला गया जहां उसने वैसे ही अपराध दोहराए.
2001 में अपनी गिरफ्तारी के बाद पॉल ने भारतीय पत्रकारों से कहा था कि कोई भारतीय अदालत उसे सजा नहीं दे सकती.
एबीसी की 2009 की एक रिपोर्ट बताती है कि 1976 में पॉल ऑस्ट्रेलिया के बनबरी से लापता हो गया था. तब यह समझा गया कि पॉल इंडोनेशिया में है जबकि वह दक्षिण भारत में रह रहा था.
