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पैरामसाला 2018: 40 संस्कृतियों का एक देश

सिडनी के सबसे बड़े मल्टीकल्चरल फेस्टिवल पैरामसाला का आगाज़ हो चुका है. इस आयोजन में यूं तो करीब 40 देशों की संस्कृति और खास तौर पर खानों का मज़ा लेने का मौका मिलेगा लेकिन इससे बढ़कर ये मौका है ऑस्ट्रेलिया की मल्टीकल्चरल सोसाइटी के रंगों को समझने का.

parramasala
Source: Gaurav Vaishnav

2 min read

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Updated

By गौरव वैष्णव


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पैरामसाला परेड में बिखरे संस्कृति के रंग

शुक्रवार की शाम को पैरामाटा की चर्च स्ट्रीट पर दुनिया के 40 देशों की संस्कृतियों के रंग फैले हुए थे। ये वो संस्कृतियां है जिनके मानने वाले ऑस्ट्रेलिया के समाज को और समृद्ध बना रहे हैं। अलग -अलग परिधानों में सजे लोग नाच-गा कर आगे बढ़ रहे थे और लोगों में उन्हें देखने की होड़ थी तो समझने की जिज्ञासा भी। 40 से ज्यादा झांकियों को लेकर आए थे 500 से ज्यादा कलाकार। यहां ईरान का पर्सियन डांस था तो ब्राज़ील का मशहूर सांबा डांस भी। चीन से जुड़ी कई सांस्कृतिक कला भी इस परेड में शामिल थी

भारत की झांकियों ने भी खींचा ध्यान

भारत के कुछ राज्यों की झांकियों ने भी लोगों को आकर्षित किया, खास तौर पर राजस्थान के घूमर डांस और तमिलनाडु के “परई” वाद्य यंत्र ने। परई का मतलब होता है बोलना, और इसे खासतौर पर किसी आपदा या आक्रमण के समय लोगों को सावधान करने के लिए प्रयोग में लाया जाता था।

 

बॉलीवुड में डांस की यात्रा

परेड के बाद बॉलीवुड गर्ल्स ने दिखाने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में डांस की यात्रा जिसकी झलकियों की शुरूआत की गई मुग़लेआज़म के मशूहूर गाने “प्यार किया तो डरना क्या से” और ये यात्रा पहुंची “बेबी डॉल में सोने की…” तक।

 

प्रीमियर ने की सराहना

न्यू साउथ वेल्स की प्रीमियर ग्लेडीज ने भी कार्यक्रम में शिरकत की उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम ऑस्ट्रेलिया की समृद्ध होती संस्कृति को दर्शाते हैं। उन्होंने भारतीय समुदाय को पैरामसाला जैसे आयोजन की शुरूआत करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि वो अप्रैल में भारत जा रही हैं और वहां वो ज़रूर ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना करेंगी।

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