पहले बिज़नेस, समाजसेवा और अब अवॉर्ड लेने में भी साथ खड़े हैं ये पति-पत्नी

कहते हैं सफलता का एक ही मंत्र होता है और वो है मेहनत.. चाहे वो सफलता आपकी जीविका कमाने में हो या फिर समाज में अपना नाम कमाने में. सफलता की एक ऐसी ही कहानी का नाम है उमेश चन्द्रा और उषा चंद्रा. पति-पत्नी के इस जोड़े को ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया डे के मौके पर लॉर्ड मेयर ने सिटीजन ऑफ द ईयर सम्मान से नवाज़ा.

Umesh and Usha Chandra_Citizen of the year Brisbane

Umesh Chandra named the Citizen of the Year along with his wife, Usha Chandra in 2019. Source: Supplied/ Umesh Chandra

ये सम्मान इसलिए भी ख़ास है कि ऐसा न के बराबर देखा गया है कि पति पत्नी को ये सम्मान एक साथ मिला हो. हालांकि उमेश चन्द्रा कहते हैं कि चाहे बिज़नेस हो या सामाजिक कार्य उषा जी ने उनका हर जगह साथ दिया है. तो ऐसे में साथ सम्मान पाना सोने पर सुहागा जैसा है. 

उमेश जी और उषा जी का साथ अबका नहीं है.. उमेश बताते हैं कि वो बचपन से एक दूसरे को जानते हैं और पहले भी वो सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे थे. वो चंडीगढ़ में कॉलेज में भी एक साथ पढ़े थे. उस दौर से अब तक बहुत कुछ बदला है लेकिन नहीं बदला तो सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने की उनकी आदत.

Umesh and Usha chandra_Citizen of the year
Source: Supplied/ Umesh Chandra

हालांकि भारत से ऑस्ट्रेलिया आने का उनका भी वो ही मकसद था जो कि हर कोई अपनी ज़िंदगी के बारे में सोचता है. अच्छी ज़िंदगी.. अच्छी पढ़ाई. लेकिन फर्क बस इतना था कि वो यहां आकर इन्ही चीज़ों में फंसे नहीं रहे उन्होंने समाज की समस्य़ाओं की ओर मुड़कर देखा और साथ मिलकर उनका सामना भी किया. उमेश चंद्रा बताते हैं कि शुरूआत में उनके सामने यहां भारतीय समुदाय के अस्तित्व, समुदाय की पहचान और संस्कृति से ज़ुड़ाव बनाए रखने की समस्या थी. जिसे उन्होंने मंदिर और कुछ ऑर्गेनाइज़ेशन बनाकर हल करने की कोशिश की 

OAM and Citizen of Australia Awardee
Source: Supplied/ Umesh Chandra

उमेश चंद्रा बताते हैं कि उस दौर में जबकि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्र कथित हिंसा का शिकार हो रहे थे. तब भी क्वींसलैंड सरकार ने उन्हें भारतीय छात्रों में विश्वास लौटाने का ज़िम्मा सौंपा था. उन्हें लाइज़िनिंग ऑफीसर का पद दिया गया ताकि वो भारतीय छात्रों से उनकी परेशानियों के बारे में बात कर सकें. 

हालांकि वो कहते हैं कि भारतीय समुदाय के सामने अब वैसी समस्याएं नहीं हैं जैसी कि 30 साल पहले हुआ करती थीं. अब मौका है जबकि भारतीय समुदाय के लोग ऑस्ट्रेलिया के समाज में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं. वो कहते हैं कि इस सब के लिए पूरे समुदाय को एकजुटता दिखानी होगी. भारतीय समुदाय के लोगों को राजनीति में उतरते देखकर भी उन्हें खुशी है लेकिन वो फिर दोहराते हैं कि बिना सामूहिक शक्ति दिखाई इस क्षेत्र में भी कुछ नहीं किया जा सकता. 


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Published

By गौरव वैष्णव



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