जी हां आपका ये खयाल वाजिब ही है। भारत में तो लगभग सभी शहरों और कस्बों में रिक्शा हमारे हर यात्रा का हिस्सा बना रहता है। और जब हम यहां आते हैं तो सबसे पहले रिक्शा ही मिस करते हैं। ये बात और है कि कुछ लोग पैदल चलने को अच्छी एक्सरसाइज़ का नाम दें। लेकिन छूटती ट्रैन पकड़ते वक्त एक्सरसाइज़?
चलिए ये अलग बहस का मुद्दा है लेकिन फिलहाल खबर ये है कि रिक्शे ने सिडनी के कुछ सब-अर्ब्स में दस्तक दे दी है। जिनमें से पैरामाटा एक अहम सब-अर्ब है फिलहाल यहां आपको पीले कलर का एक ही पेडिकैब घूमते हुए दिखाई देगा जिसे ड्राइव कर रहे हैं फिलिप।

फिलिप बताते हैं कि अभी ये रिक्शा ट्रायल बेसिस पर चल रहा है और जल्द ही यहां पर और भी रिक्शे देखने को मिलेंगे।
फिलिप का अनुभव
फिलिप बताते हैं कि लोग रिक्शे को देखकर उत्साहित हो जाते हैं और उनसे एक बार बैठाने की गुजारिश करते हैं। लोग रिक्शे का स्वागत कर रहे हैं लेकिन उनकी कुछ चिंताएं भी हैं। जैसे ट्रैफिक पर प्रभाव और सबसे अहम ये कि किराया क्या होगा? हालांकि किराये को लेकर फिलिप भी अभी स्पष्ट नहीं हैं।
कैसा है ये पैडी कैब?
दिखने में ये बहुत कुछ भारत में चलने वाले रिक्शे जैसा ही है बस यहां सुरक्षा के साथ कुछ खूबियां इसमें जुड़ गयीं हैं। जैसे कि स्कूटर की तरह इसमें इंडिकेटर्स हैं, ये बैटरी से भी चल सकता है। स्पीड पर नियंत्रण रखा जा सके इसके लिए डिज़िटल स्पीडोमीटर भी लगाया गया है। आरामदायक सीट के साथ हल्की बारिश से बचने के लिए शेड भी दिया गया है।
तो हम इस वक्त इतना ही कह सकते हैं कि शुरूआत हो चुकी है और पैडी कैब की सफलता के आ

कलन के लिए कुछ समय तो देना ही होगा।
