स्टूडेंट्स को मालिकों के शोषण से बचाने की कोशिश

ऑस्ट्रेलिया में पढ़ रहे इंटरनैशनल स्टूडेंट्स से कहा जा रहा है कि अगर उनके साथ काम के दौरान शोषण होता है तो आगे आएं और शिकायत करें. फेयरवर्क ऑम्बड्समन ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नई रणनीति पेश की है जिसके तहत छात्रों को उनके अधिकारों के प्रति और ज्यादा जागरूक बनाने की मुहिम शुरू की जाएगी.

Tertiary students at the University of Melbourne in Melbourne, Wednesday, May 8, 2012. (AAP Image/Julian Smith) NO ARCHIVING

International students at Melbourne University in Melbourne, Wednesday, May 8, 2012. (AAP Image/Julian Smith) NO ARCHIVING Source: AAP

24 साल के नेपाली स्टूडेंट अविशेक तीन साल पहले सिडनी आए थे. वह अकाउंटिंग पढ़ने आए थे. अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने एक रेस्तरां में काम करना शुरू किया. और उन्हें पता था कि उन्हें बहुत कम पैसे दिए जा रहे हैं लेकिन वह कुछ बोले नहीं, नौकरी खोने के डर से. वह बताते हैं, "जितना पैसा मिलना चाहिए था, मुझे उससे कहीं कम मिलता था. लेकिन मैं कुछ नहीं कहता था क्योंकि मुझे पता था कि आखिर तो मुझे अपनी यूनिवर्सिटी फीस देनी है और उसके लिए काम करना ही होगा."

अविशेक के साथ जो हुआ, वह आम बात है. फेयरवर्क ऑम्बड्समन कहता है कि इंटरनैशनल स्टूडेंट्स की ओर से बहुत बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें आती हैं. पिछले वित्त वर्ष में ऑम्बड्समन ने कोर्ट में जो केस दायर किए उनमें से लगभग आधे गैर-ऑस्ट्रेलियाइयों के थे. और एक तिहाई अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स के. लेकिन फेयरवर्क ऑम्बड्समन की नैटली जेम्स कहती हैं कि संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि बहुत से स्टूडेंट्स शिकायत ही नहीं करते. वह बताती हैं, "हमें पता है कि स्टूडेंट्स में अपने वीसा को लेकर भी चिंता होती है इसलिए वे आगे नहीं आते. लेकिन इस कारण वे गंभीर शोषण का शिकार होते हैं."

इंटरनैशनल स्टूडेंट्स हफ्ते में 20 घंटे ही काम कर सकते हैं. लेकिन काउंसिल ऑफ इंटरनैशनल स्टूडेंट्स ऑस्ट्रेलिया के अध्येक्ष बिजय सापकोता कहते हैं कि वे अक्सर 20 घंटे से कहीं ज्यादा काम करते हैं क्योंकि उन्हें अपनी पढ़ाई का और दूसरे खर्चे निकालने होते हैं.

ऑम्बड्समन के मुताबिक मालिक इस बात का फायदा उठाते हैं और कर्मचारियों को जबान बंद रखने को कहते हैं. अविशेक के साथ ऐसा ही होता था. वह कहते हैं, "अगर मैं 20 घंटे से ज्यादा काम करता तो मेरे दिमाग में पहली बात ये आती कि मुझे ऑस्ट्रेलिया से बाहर भेज दिया जाएगा. हर इंटरनैशनल स्टूडेंट ऐसा ही सोचता है."

ऑम्बड्समैन ने एक रिसर्च कराई जिसमें पता चला कि 60 फीसदी अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स मानते हैं कि अगर उन्होंने काम के बारे में शिकायत की तो हालात बदलना तो दूर की बात है, और खराब हो सकते हैं. इसी डर से छुटकारा दिलाने के मकसद से ऑम्बड्समन ने एक नई रणनीति बनाई है ताकि स्टूडेंट्स को आगे आकर शिकायत करने के लिए तैयार किया जाए. जेम्स कहती हैं कि स्टूडेंट्स में यह भरोसा पैदा करना होगा कि अगर वे शिकायत करते हैं तो उनके वीसा पर कोई आंच नहीं आएगी.

ऑम्बड्समन चाहता है कि ऑस्ट्रेलिया के कामगारों को उनके हितों और अधिकारों की जानकारी हो. किसी भी कर्मचारी को कम से कम 18.29 डॉलर प्रतिघंटा मेहनताना मिलना चाहिए. कैजुअल वर्कर्स के लिए न्यूनतम मेहनताना 22.86 डॉलर प्रतिघंटा है. इसके अलावा कर्मचारियों को पेनल्टी रेट्स भी मिलने चाहिए यानी अतिरिक्त घंटों या छुट्टी के दिन काम करने पर अतिरिक्त पैसा. कर्मचारियों की मदद के लिए ऑम्बड्समन की वेबसाइट पर 30 भाषाओं में जानकारी उपलब्ध है.

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By Abbie O'Brien



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