तो कैसे चुनेंगे आप अपना प्रतिनिधि? थोड़ा अपडेट हो जाएं

23 मार्च को न्यू साउथ वेल्स में चुनाव हैं और केंद्र के चुनाव जिन्हें हम फेडरल इलैक्शन कहते हैं वो भी ज्यादा दूर नहीं हैं. लेकिन क्या हम इस पूरी प्रक्रिया को अच्छी तरह से जानते हैं.. हो सकता है कि आपमें से ज्यादातर का जवाब हां में हो, जो अच्छी बात है लेकिन ये वक्त हैं एक बार फिर उस पूरी प्रक्रिया को समझने का जिससे कोई भी वोटर पूरी ज़िम्मेदारी के साथ अपना प्रतिनिधि चुन सकता है.

Election

Source: Getty Images

ऑस्ट्रेलिया में चुनाव की प्रक्रिया को समझने के लिए हमने बात की अंजू माथुर से. अंजू डिमेंशिया कंसल्टेंट हैं और डिमेंशिया सपोर्ट ग्रुप फॉर इंडियन ऑस्ट्रेलियन की संस्थापक अध्यक्ष भी हैं. लेकिन उतनी ही सक्रियता से वो सामाजिक कार्यों में भी सम्मिलित रहती हैं. और इसके लिए उन्हें साल 2017 में हिल्स शायर काउंसिल के मेयर ने सिटीजन ऑफ द ईयर सम्मान से नवाज़ा है.

Anju Mathur
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ऑस्ट्रेलिया में वोटिंग का इतिहास

अंजू माथुर बताती हैं कि 1924 के इलैक्टोरल एक्ट के तहत ऑस्ट्रेलिया में वोटिंग अनिवार्य है. इसके पीछे के कारणों पर बात करते हुए अंजू बताती हैं कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद से ऑस्ट्रेलिया में वोटिंग के प्रतिशत में काफी गिरावट आई थी. और साल 1924 में वोटिंग को यहां के वयस्क नागरिकों के लिए अनिवार्य कर दिया गया.

ऑस्ट्रेलिया में मताधिकार पर बात करते हुए अंजू बताती हैं कि यहां के आदिवासियों को मत डालने का अधिकार 1962 में मिला था हालांकि तब भी ये उनके लिए अनिवार्य नहीं था हालांकि साल 1984 में इसे आदिवासी समुदाय के लिए भी अनिवार्य कर दिया गया.

Posters explaining how to vote are seen outside a polling booth in Brisbane, Saturday, July 2, 2016. About 15 million Australians will cast their vote in today's federal election. (AAP Image/Dan Peled) NO ARCHIVING
Source: AAP Image/Dan Peled

बाध्यता नहीं, अधिकार है मतदान

हालांकि अंजू कहती हैं कि इससे बावजूद वो ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को ये ही संदेश देंगी कि इसे बाध्यता के तौर पर न देखें क्योंकि ये आपका विशेषाधिकार और आपकी आवाज़ है. वो कहती हैं कि आपको तय करना चाहिए कि संसद में कानून बनाने में कौन आपका प्रतिनिधत्व करेगा. और आप ये तभी सुनिश्चित कर सकते हैं जब आप वोट करें.

वोटर बनने की प्रक्रिया

अब बात करते हैं उनकी जो अभी वयस्क हो रहे हैं या फिर यूं कहें कि जो वोटिंग के लिए तय उम्र तक पहुंच चुके हैं. और उनकी भी जिन्होंने इस साल ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता प्राप्त की है. अंजू बताती हैं कि उनके लिए वोटिंग प्रक्रिया की शुरूआत सबसे पहले खुद को एनरोल कराने से होती हैं और इसके लिए सभी शर्तों को पूरा करने वाले नागरिक इलैक्टोरल कमीशन में जाकर एनरोलमेंट कर सकते हैं. अंजू एनरोलमेंट की प्रक्रिया में सजग रहने की सलाह देती हैं वो कहती हैं कि ये सुनिश्चित कीजिए की आपकी दी गई जानकारी एक सही होने चाहिए. वो कहती हैं कि उन लोगों को भी जिनका कि नाम में परिवर्तन हुआ है या फिर पते में कोई बदलाव हुआ हैं उन्हें भी इलैक्टोरल कमीशन की वेबसाइट www.aec.gov.au में जाकर ये जानकारियां अपडेट करनी चाहिए.

उपलब्ध हैं वोटिंग के कई तरीके

अब बात करते हैं वोटिंग के उपलब्ध अलग अलग तरीकों की. पहला जो सामान्य तरीका है कि आप बूथ में जाकर वोट डाल सकते हैं. दूसरा ये कि आप आई-वोटिंग भी कर सकते हैं. और उसके लिए भी आपको इलैक्शन कमीशन की वेबसाइट पर रजिस्टर करना होगा. इसके अलावा पोस्टल वोटिंग, मोबाइल वोटिंग और देखने में परेशानी का अनुभव करने वालों के लिए टेलीफोन वोटिंग की भी सुविधा है.

Mpiga kura aweka kura yake ndani ya sunduku la kura
Mpiga kura aweka kura yake ndani ya sunduku la kura Source: AAP

अंजू बताती हैं कि हालांकि कानूनन ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को 18 साल की उम्र से अधिक होने पर वोट डालना अनिवार्य है और ऐसा ना करने पर आपको जुर्माना देना पड़ सकता है. इसीलिए आपको वोट करने के कई तरीके उपलब्ध कराए गये हैं. ये ही नहीं इस बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इलैक्शन कमीशन की वेबसाइट में 24 भाषाओं में जानकारी उपल्बध है.

स्वयंसेवकों के लिए भी एक मौका

अंजू बताती हैं कि जो लोग चुनावों के दौरान स्वयंसेवा करना चाहते हैं तो वो भी अपना नाम इलैक्शन कमीशन में रजिस्टर कर सकते हैं. आप ये भी बता सकते हैं कि आप कहां पर काम करना चाहते हैं. और आप क्या काम कर सकते हैं. जाहिर है ये समुदाय से जुड़ने का एक अच्छा अवसर है, और इससे कुछ अतिरिक्त कमाई भी हो सकती है. 


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4 min read

Published

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By Gaurav Vaishnava


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