ट्रंप के ट्वीट इतने असरदार क्यों होते हैं?

जानकार मानते हैं कि ट्रंप जानते हैं कि उनके ट्वीट्स मीडिया में हेडलाइंस बनते हैं और ऐसा सोचकर ही वह ट्वीट करते हैं.

President Donald Trump during a campaign rally Saturday, Feb. 18, 2017, in Melbourne, Fla. (AP Photo/Chris O'Meara)

President Donald Trump during a campaign rally Saturday, Feb. 18, 2017, in Melbourne, Fla. (AP Photo/Chris O'Meara) Source: AAP Image/AP Photo/Chris O'Meara

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप दुनिया के सबसे ताकतवर ट्वटिर यूजर हैं. उनका एक ट्वीट दुनिया भर के मीडिया का एजेंडा तय करने की ताकत रखता है. सिर्फ 140 कैरक्टर्स में वह अपने राजनीतिक विरोधियों को खारिज करने से लेकर लोगों तक अपनी बात पहुंचाने और मीडिया को काबू करने का काम कर लेते हैं.

ट्रंप के ट्वीट्स पर लोग गुस्सा होते हैं, उबलते हैं, समर्थन करते हैं लड़ पड़ते हैं, ब्रेकिंग न्यूज चलाते हैं और इस सबके जरिये अमेरिका के लोगों को सीधे सीधे बताते हैं कि उनका राष्ट्रपति क्या सोच रहा है. ट्रंप के ट्वीट पॉलिटिकली करेक्ट नहीं होते और ना ही सोची-समझी रणनीतिक लाइंस पर होते हैं. वे तो बस होते हैं, स्पष्ट, कड़क और एकदम निजी. यूएलसीए की पॉलिटिकल एक्सपर्ट जॉर्जिया केरनेल कहती हैं कि इसी वजह से वे इतनी असरदार होते हैं. उनके शब्दों में, "ट्रंप के ट्वीट भड़काते हैं, ऐसा कहना भी उन्हें कम करके आंकना होगा. अब तक जो राजनेता होते थे वे इस तरह की बांटने वाली बयानबाजी से बचते थे." आलोचक भले ही ट्रंप को अपरिपक्व और अनुशासनहीन बताते हों लेकिन केरनेल मानती हैं कि उनके ट्वीट्स बहुत सोचे-समझे होते हैं. वह कहती हैं, "ट्रंप ने तो कम्यूनिकेशन रिसर्च का एक नया फील्ड खोल दिया है."

2015 में, जब से ट्रंप ने ऐलान किया कि वह राष्ट्रपति चुनाव लड़ेंगे, तभी से ट्विटर पर उनका मोर्चा खुल गया था. बीते साल अप्रैल में उन्होंने सीएनएन पर कहा था, "इससे मुझे लोगों तक पहुंचने में बहुत फायदा होता है." ट्रंप ने एक से एक भड़काऊ ट्वीट्स करके यह सुनिश्चित किया कि वह खबरों में बने रहेंगे.

ट्रंप की जीत का सटीक पूर्वानुमान लगाने वाले चंद लोगों में से एक हैं मैट शेरवुड. परपेचुअल इन्वेस्टमेंट्स नाम की कंपनी में हेड स्ट्रैटजिस्ट शेरवुड कहते हैं, "ट्रंप एक ऐसे इंसान हैं जो जानबूझकर ऐसी बातें कहते हैं जिन पर लोग रिऐक्ट करें. तो वह जो भी कहते हैं जानबूझ कर कहते हैं. वह सोचते हैं कि इसका फायदा कैसे उठाया जाएगा, तब कहते हैं."

पर ट्रंप के ट्वीट्स का मामला सिर्फ इतना ही नहीं है बल्कि इससे गहरा है. न्यू यॉर्क टाइम्स में इंटरनेटस कल्चर फेलो अमांडा हेस उनके ट्वीट्स की तुलना अरस्तु और सिसेरो के सिद्धांतों से करती हैं. वह कहती हैं कि ट्रंप के ट्वीट्स लॉजिक, भरोसे और इमोशन की तिकोनी ताकत रखते हैं. सपाट बयान आधार बनाता है. उसमें बात इतनी सटीक होती है कि लोगों पर इमोशनल असर होता है और वह अपने विरोधी पर सख्त हमला करते हैं जिससे उसकी विश्वसनीयता ही खत्म हो जाती है. ऐसा ट्रंप के कई ट्वीट्स में देखा भी जा सकता है जैसे हाल ही में जब कोर्ट ने उनके सात देशों के नागरिकों पर बैन वाले आदेश पर स्टे लगा दिया तो उन्होंने तीखा ट्वीट किया. उन्होंने तीन लाइंस लिखीं.

एक जज ने बैन हटा दिया. (इस लाइन ने आधार तैयार किया.)

अब बहुत से बुरे और खतरनाक लोग हमारे देश में आ सकते हैं. (इस लाइन ने लोगों पर इमोशनल असर डाला.)

बेहद बुरा फैसला. (जज की विश्वसनीयता पर सवाल.)

जानकार मानते हैं कि ट्रंप जानते हैं कि उनके ट्वीट्स मीडिया में हेडलाइंस बनते हैं और ऐसा सोचकर ही वह ट्वीट करते हैं. वह जान रहे होते हैं कि इसके बाद क्या कहा जाएगा और उसका जवाब पहले से तैयार होता है. इसलिए उनका हर ट्वीट वही असर छोड़ता है, जो उससे उम्मीद होती है.

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Published

By Ben Windsor

Presented by विवेक आसरी



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