मैलकम टर्नबुल को लगता है कि भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता नहीं हो पाएगा. नई दिल्ली और मुंबई में चार दिन बिताने के बाद टर्नबुल वापस ऑस्ट्रेलिया लौटे हैं. उन्होंने एबीसी को बताया कि अभी यह समझौता होता नहीं दिख रहा है.
टर्नबुल ने कहा, "हो सकता है निष्कर्ष यह निकले कि अभी दोनों देश ऐसे समझौते के लिए एक-दूसरे से बहुत दूर हैं."
टर्नबुल का मानना है कि भारत का प्रोटेक्शनिजम यानी संरक्षणवाद एक बड़ी समस्या है. उन्होंने कहा, "भारत में प्रोटेक्शनिजम की परंपरा बहुत गहरी बसी हुई है."
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन हालात को बदलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन चीजों को बदलने की अपनी एक गति होती है. टर्नबुल ने कहा, "सच्चाई यह है कि भारत की पेशकश अभी समय के अनुरूप नहीं है."
ऑस्ट्रेलिया भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता चाहता है. पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबट ने भी 2015 में यह समझौता करने की कोशिश की थी. और अब टर्नबुल भी निराश लौटे हैं.
हालांकि टर्नबुल ने उम्मीद जताई है कि बिना किसी औपचारिक समझौते के भी दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा.
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