ब्रिटेन के गृह मंत्री साजिद जावेद ने भारत के भगौड़े व्यापारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है. पिछले साल अप्रैल में गृह मंत्री बने जावेद ने रविवार को इस आदेश पर दस्तखत किए हैं.
ब्रिटिश अदालत ने करीब आठ हफ्ते यह मामला मंत्रालय को भेजा था और प्रत्यर्पण पर फैसला गृह मंत्री को सौंप दिया गया था.
ब्रिटिश गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया को बताया कि मामले के सारे पहलुओं का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद गृह मंत्री ने 3 फरवरी को विजय माल्या को भारत प्रत्यर्पित करने के फैसले पर दस्तखत कर दिए.
शराब व्यापारी विजय माल्या पर भारत में धोखाधड़ी और मनी लॉउन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप हैं. उन पर भारतीय बैंकों के लगभग नौ हजार करोड़ रुपये ना लौटाने का आरोप है. सीबीआई मामले की जांच कर रही है. जांच के दौरान ही विजय माल्या ब्रिटेन भाग गए थे और कोर्ट ने उन्हें भगौड़ा घोषित कर दिया था.
लगभग दो साल पहले, फरवरी 2017 भारत सरकार ने ब्रिटेन माल्या को प्रत्यर्पित करने का औपचारिक अनुरोध किया था.
गृह मंत्री के आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए माल्या के पास दो हफ्ते का वक्त है. अगर वह अपील नहीं करते हैं तो आदेश के 28 दिन के भीतर उन्हें भारत भेज दिया जाएगा. लेकिन अपील के लिए भी हाई कोर्ट की इजाजत की जरूरत होगी.
सोमवार को माल्या ने ट्वीट किया कि वह आदेश के खिलाफ अपील करेंगे. 63 वर्षीय माल्या ने लिखा, "10 दिसंबर 2018 को जब वेस्टमिन्स्टर मैजिस्ट्रेट कोर्ट ने फैसला दिया था मैंने तभी अपनी अपील करने की मंशा जाहिर कर दी थी. गृह मंत्री के फैसले से पहले मैं यह प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकता था. अब मैं यह प्रक्रिया शुरू करूंगा."
उधर भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि प्रक्रिया जल्द पूरी होगी.
भारतीय जनता पार्टी ने इस फैसले को भारत की मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी बताया है. पार्टी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हाराव ने कहा,
"यह फैसला भारतीय अधिकारियों की लगातार कोशिश का परिणाम है. यह दिखाता है कि मोदी सरकार देश से लूटे गए हर रुपये को वापस लाने और हर दोषी को कठघरे तक पहुंचाने के प्रतिबद्ध है."
