पिछले कुछ हफ्तों में काफी भारतीय माइग्रेंट्स ने हमारे सहयोगी एसबीएस पंजाबी से संपर्क किया और बताया कि विक्टोरिया की लाइसेंसिंग अथॉरिटी भारतीय लाइसेंस को स्वीकार नहीं कर रही है जबकि वे भारतीय कॉन्स्युलेट द्वारा वैरीफाई कर दिए गए हैं. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें लर्नर्स लाइसेंस लेने को कहा जा रहा है.
आमतौर पर ड्राइविंग टेस्ट पास कर लेने पर भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस धारक को ऑस्ट्रेलिया का लाइसेंस दे दिया जाता है.
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लेकिन मेलबर्न के भौमिक शाह का दावा है कि 2001 से भारतीय लाइसेंस धारक होने के बावजूद जब उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लाइसेंस के लिए अप्लाई किया तो उनका भारतीय लाइसेंस खारिज कर दिया गया और कहा गया कि उनका लाइसेंस वैरिफाई नहीं किया जा सका.
इसी तरह हिमांशू मल्होत्रा का दावा है कि VicRoads ने उनकी पत्नी का भारतीय लाइसेंस स्वीकार नहीं किया जबकि उन्होंने भारतीय कॉन्स्युलेट से उसे वैरिफाई भी करवाया था. मल्होत्रा ने एसबीएस पंजाबी को बताया, "हमें VicRoads से एक पत्र मिला कि मेरी पत्नी का लाइसेंस प्रमाणित नहीं है और इसके आधार पर वह विक्टोरिया में ड्राइव नहीं कर सकतीं."
एसबीएस पंजाबी ने बहुत से पीड़ितों से बात की है, जिसे यहां पढ़ा जा सकता है.
भारतीय कॉन्स्युलेट के एक अधिकारी ने बताया, "काफी लोगों ने व्यवस्था का गलत फायदा उठाते हुए नकली भारतीय लाइसेंस बदल VicRoads अब अपने स्तर पर उन्हें वैरिफाई करते हैं."
लेकिन कैनबरा स्थित भारतीय उच्चायोग ने कहा कि भारतीय लाइसेंस को खारिज करने की कोई वजह नहीं है. एसबीएस पंजाबी को भेजे एक बयान में उच्चायोग ने कहा, "हमें नहीं लगता कि कॉन्स्युलेट द्वारा वैरिफाई करने के बाद बहुत बड़ी संख्या में भारतीय लाइसेंस खारिज किए जा रहे हैं. लेकिन, कम संख्या में भी अगर ऐसा हो रहा है, तो ऐसा होने की कोई वजह हमें नजर नहीं आती."
