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"वो रैलियों वाला मज़ा नहीं है यहां"

ऑस्ट्रेलिया में पहली बार मतदान के लिए तैयार लोग कई मामलों में यहां के चुनावों की प्रक्रिया को अच्छा मानते हैं. राजनीति व्यवस्था पर भी सकारात्मक राय देते हैं. लेकिन एक बात है जिसकी उन्हें कमी खलती है, वो है भारत वाले चुनावी माहौल की. गली-नुक्कड़ों पर होने वाली चुनावी बहसों की.

First time voter for Federal Election 2019
Source: Supplied

3 min read

Published

By Gaurav Vaishnava


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18 मई को देश की राजनीति की दिशा और दशा तय करने के लिए देश के नागरिक मतदान करेंगे. इसमें से कुछ ऐसे हैं जो पहली बार इस अहम ज़िम्मेदारी को अंजाम देने जा रहे हैं. उनमें से कुछ वो युवा हैं जो अभी मतदान की आधिकारिक उम्र तक पहुंचे हैं लेकिन भारतीय मूल के लोगों की बात की जाए तो इनमें से ज्यादातर वो प्रवासी हैं जिन्होंने कुछ वक्त पहले ही ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता प्राप्त की है. ऐसे ही कुछ प्रवासियों से हमने पूछे सवाल की आखिर कैसा लग रहा है उन्हें.. क्या हैं उनके लिए अहम चुनावी मुद्दे.. और भारत से यहां के चुनावों में किस तरह का अंतर वो देखते हैं

सबसे पहले आपसे मिलवाते हैं रोहित से.. रोहित ने एक साल पहले ही ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता ली थी. उनका कहना है कि उनके लिए ऑस्ट्रेलिया में वोट डालना एक मिला-जुला सा अहसास है. वो कहते हैं कि भारत में चुनावी रैलियां और टीवी चैनलों के माध्यम से चुनावी माहौल बना होता है लेकिन यहां उन्हें ये कमी ज़रूर खलती है. हालांकि रोहित रैली जरूर मिस कर रहे हैं लेकिन वो मानते हैं कि भारत में पार्टियों की पॉलिसी उतनी बेहतर तरीके से नहीं बताई जा रही है जितनी कि यहां. इन चुनावों के बाद रोहित आस्ट्रेलिया की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार चाहते हैं.

अब मिलिए वेंकट से जो कि भारत में आंध्रप्रदेश के मूल निवासी थे.. हालांकि वो उत्तर भारत में भी काफी रहे हैं. और पिछले साल ही उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता ली है. आपको बता दें कि वो प्री-वोटिंग कर चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया में वोट करने के उनके पहले अनुभव के बारे में वो कहते हैं कि सबसे पहले तो वो कम जनसंख्या होने की वजह से कम भीड़ से उत्साहित हैं. हालांकि वो कहते हैं कि वो ज्यादा पार्टियों के बारे में बहुत कुछ नहीं जानते थे. भारत की राजनीति से यहां कि राजनीति में हालांकि उन्हें कोई अंतर नहीं लगता. लेकिन वो मानते हैं कि पॉलिसी के बारे में यहां ज्यादा साफ तरीके से लोगों को पता लगता है. चुनावों के बाद वेंकट आने वाली सरकार से चाहते हैं कि वो आस्ट्रेलियाई बाज़ार का ख्याल रखे.

और अब मिलिए अनुज नौटियाल से अनुज भारत में उत्तराखंड से ताल्लुक रखते हैं. वो कहते हैं कि उनके लिए यहां वोट डालना एक अलग ही अनुभूति है. वो यहां आई-वोट और प्री वोटिंग जैसी सुविधा से प्रभावित हैं. भारत की राजनीति और यहां की राजनीति में और खासकर चुनावों के अंतर के बारे वो कहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में चुनाव लोगों की आम दिनचर्या को प्रभावित नहीं करते जो कि अच्छी बात है लेकिन वो फिर भी भारत का वो चुनावी माहौल 'मिस' करते हैं. अनुज के लिए ऑस्ट्रेलिया में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा घर है. वो कहते हैं कि प्रॉपर्टी को लेकर चुनावी दलों की योजनाओं पर उनकी नज़र है. हालांकि वो चाइल्ड केयर और शिक्षा को भी अहम मुद्दा मानते हैं.


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