फैमिली बिजनस क्या परिवार को तोड़ सकता है?

परिवार में तो तब भी झगड़े हो जाते हैं जबकि सब कुछ ठीकठाक चल रहा हो. ऐसे में तब क्या होता होगा जबकि पूरा परिवार किसी बिजनस में साथ लगा हो.

The Bailey family have kept their business across mutliple generations.

The Bailey family have kept their business across mutliple generations. Source: Supplied

ऑस्ट्रेलिया के 70 फीसदी व्यापार परिवारों के लोग ही चलाते हैं. इसलिए यह कहा जा सकता है कि परिवार के लोगों के बीच की केमिस्ट्री काम तो करती है, लेकिन जरूरी नहीं कि हर बार यह काम कर ही जाए. इन व्यापारिक परिवारों को तलाक से लेकर सास-ससुर से झगड़े तक बहुत सी मुश्किल परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है.

एसबीएस टीवी पर इनसाइट कार्यक्रम ने बिजनस चलाने वाले इन परिवारों की जिंदगी में झांकने की कोशिश की है और कई कहानियां सामने आईं. जैसे कि जेसन ली. ली सिडनी डैरल ली चॉकलेट फैक्ट्री के आंगन में बड़े हुए हैं. यह फैक्ट्री उनका फैमिली बिजनस है. वह बताते हैं, "मैं तब 10 साल का रहा हूंगा. स्कूल की छुट्टियां चल रही थीं. और एक दिन हमें कहा गया कि हमें फैक्ट्री के पैकिंग रूम में काम करना है. और कुछ देर बाद हम डिब्बों में चॉकलेट पैक कर रहे थे."

ली के बचपन में यह जितना प्यारा था, उतना रहा नहीं. चॉकलेट की मिठास व्यापारिक झगड़ों की कड़वाहट के आगे टिक नहीं पाई. ली के शब्दों में, "कहते हैं कि जो परिवार साथ काम करता है, वो साथ खेल नहीं सकता. हमारे परिवार के बारे में तो यह बात एकदम सच साबित हुई." 1995 में जेसन के पिता ने उन्हें काम से निकला दिया. जेसन कहते हैं, "मेरे पिता के शब्दों में, मैं ठीक-ठाक काम में एक अड़ंगा था. वह मुझसे जो करवाना चाहते थे, मैं उस सब में फिट नहीं बैठ पाया." उसके बावजूद जेसन हर शॉप ओपनिंग पर जाते रहे. लेकिन 2012 में उनके परिवार ने अपना व्यवसाय बेच दिया. जेसन कहते हैं, "मैं एक ली हूं. मतलब, किसी दुकान का फीता काटने के लिए मुझसे बेहतर कौन हो सकता था."

एक कहानी रौला आगेंलोपोलस की है. उनके पास अपने परिवार के व्यापार में शामिल होने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. वह आर्ट डायरेक्टर के तौर पर एक ग्लैमरस जॉब कर रही थीं. लेकिन उनके पिता ने कहा कि अब वह अपनी जॉब छोड़े और उनका टैक्सी कारोबार संभाले. रौला उस वक्त को कुछ यूं याद करती हैं, "मुझे याद है जब उन्होंने मुझसे कहा कि मैं कुछ महीनों के लिए ग्रीस जा रहा हूं और मैं चाहता हूं कि तुम आकर सारा व्यापार संभालो. मैं अगले हफ्ते चला जाऊंगा. तुम डूबो या उतरो, जो भी हो."

रौला के लिए तो यह 60 के दशक में ग्रीस से आए अपने पिता की विरासत संभालना था. वह कहती हैं, "उनकी सोच थी कि हम संघर्ष करके सीखें क्योंकि इससे बेहतर सबक नहीं हो सकता. वह कहते थे कि जब मैं आया था तो मेरी मदद को कोई नहीं था और मैंने जीरो से शुरू करके सब बनाया." रौला कहती हैं कि ऐसे ही एक दिन अगली पीढ़ी उनका काम संभालेगी.

जब परिवार में व्यापार होता है, तो अनुभव बहुत जुदा हो सकते हैं. बहुत से सपने टूटते हैं, बहुत से रिश्ते टूटते हैं लेकिन हर बार कुछ नया बनता है.


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3 min read

Published

By Amanda Xiberras

Source: Insight



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